मेरी राय

 यूपी के तीन क्षेत्रपों से हार चुकी है दिल्ली

- चौथी बार की स्थिति न बने तो अच्छा

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सोच रहा हैं, एक बार याद दिला दूँ।

उत्तर प्रदेश के तीन क्षत्रपों के बारे में जिन्हें दिल्ली ने पद के अहंकार में छेड़ा और उसे पराजय का मुंह देखना पड़ा।

1- चौधरी चरण सिंह। सीधे साधे जननेता। किसान आधार, किसान से प्यार।

प्रधानमंत्री पद की ताकत के अहंकार में उन्हें दिल्ली ने अपमानित किया। 

- हुआ क्या ? सरकार गई और चौधरी चरण सिंह दिल्ली की गद्दी पर बैठे। 

2 - विश्वनाथ प्रताप सिंह। कांग्रेस के वफादार सेनानी। सम्पूर्ण असर यूपी तक। दिल्ली ने छेड़खानी की। दिल्ली को चोर घोषित कर देश के नेता के रूप में दिल्ली की कुर्सी पर बैठे।

3 - राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर - शुद्ध  समाजवादी, स्वाभिमानी और मौलिक चिन्तक।  लोकनायक जयप्रकाश के सवाल पर भिड़ गए पगलाई दिल्ली से और दिल्ली को 1977 देखना पड़ा। 

- दिल्ली बनाम चन्द्रशेखर का युद्ध लम्बे समय तक चला। एक तरफ सुल्तान बदलते रहे। दूसरी तरफ से चन्द्रशेखर लड़ते रहे और वह भी जीते और दिल्ली के सुल्तान बने।

- इधर एक सप्ताह से दिल्ली की शौर्य गाथा फिर गायी जा रही और  टारगेट किया जा रहा है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को।

- सोचा पूर्व की तीन घटनाओं को याद दिला दूँ। मेरा मानना है कि चौथी बार न हो तो अच्छा है।

- कारण ? मेरी राय है कि आपदा के समय सबको मिलजुल कर काम करना चाहिए।

- दिल्ली की शौर्य गाथा के माध्यम से जो सन्देश दिया जा रहा है, वह अपमानजनक है जो आपदा के मुकाबले के समय ठीक नहीं है। 

- अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश को अरविंद कुमार शर्मा के रूप में एक ऐसा नेता मिला है जिसे शानदार प्रशासनिक अनुभव हासिल है। इस अनुभव का बेहतर से बेहतर उपयोग होना चाहिए लेकिन जो मैदान में है, उसे चिढ़ाकर नहीं।

- शेष जो नियत चाहे। 

- धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

- राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर - सन्सद में दो टूक, लोकबन्धु राजनारायण - विचार पथ एक, अभी उम्मीद ज़िन्दा है