कोरोना - समस्या से समाधान तक

 कोरोना  की दूसरी लहर ने तबाही मचा दी है। पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है,चारों तरफ दवाइयों, ऑक्सीजन व बेड की कमी है। इसने देश की स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर कर दिया है। केंद्र व राज्य सरकारें एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं ।शायद दोनों ही बराबर की दोषी हैं । जब हम अपनी गलतियों को स्वीकार करेंगे तभी हम उन्हें सुधार सकेंगे । हम सभी इंसान हैं भगवान नहीं अतः गलतियां होना स्वाभाविक है। इन्हें स्वीकार कर ही  हम देश की भयावह तस्वीर को बदल सकते हैं  - 

(1) -  पहली गलती हम सब देशवासियों की है लगभग सभी ने कोरोना प्रोटोकॉल जैसे मास्क ,सेनीटाइजर, सोशल डिस्टेंसिंग आदि का सही ढंग से पालन नहीं किया । संक्रमित होने के बाद भी आइसोलेशन में नहीं रहे।

(2) -  हमने कोविड-19 महामारी को हल्के में लिया और इस आसन्न खतरे के प्रति उदासीन रहे।आज देश में जिन चीजों की कमी है उन सबका हमने निर्यात किया।

( 3 ) - हमने बाजारों ,समारोहों ,चुनाव रैलियों, क्रिकेट मैच में और लगभग सभी जगह पहले जैसी  भीड़ जमा की।

(4) -  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सीनियर खिलाड़ियों का क्रिकेट मैच आयोजित किया गया जिसमें कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाई गई और हजारों की भीड़ जमा हुई। छत्तीसगढ़ में इसके पश्चात ही कोरोना विस्फोट हुआ ।

(5) - कई राज्यों में विधानसभा  और स्थानीय चुनाव संपन्न कराए गए जिसमें हजारों की भीड़ जमा हुई लगभग सभी धर्मों के धार्मिक आयोजन आयोजित किए गए जिसमें भी भारी भीड़ जमा हुई । अपने कमरे में मास्क लगाकर बातचीत करने वाले नेता भी इन चुनावी सभाओं में बिना मास्क  के नजर आए ।

 (6 ) - किसी से भी सलाह मशविरा किए बिना और बिना सोच विचार किए पूरे देश में 78 दिनों का लॉकडाउन लगा दिया गया उस समय देश में कुल 600 मरीज थे । यह पूरे विश्व में अनोखा था ।उस वक्त  इसे पहला विकल्प माना गया और  अभी इसे अंतिम विकल्प बताया जा रहा है ।इसका देश की अर्थव्यवस्था पर काफी  बुरा प्रभाव पड़ा जिससे हम अभी तक उबर नहीं सके हैं ।

 (7 ) - जवाबदेही से जिम्मेदारी बढ़ती है और जिम्मेदारी के बदौलत ही कुछ काम संभव है परंतु आज किसी की कोई जवाबदेही नजर नहीं आती है ।इस पर आज तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई है। एक भी सर्वदलीय बैठक नहीं बुलाई गई है ।

( 8 ) - तालाबंदी के दौरान रोज कमाने खाने वालों के लिए कोई योजना नहीं थी और आज भी कमोबेश यही हालत है ।

( 9 ) - कोरोना से मौतों के आंकड़े भी छुपाए जा रहे हैं हमें संकट का सामना करना चाहिए । इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता की जरूरत है ।  आपात फंडों द्वारा किए जा रहे आय व्यय का पूरा ब्यौरा दिया जाना चाहिए ।

(10 ) - सभी सरकारों द्वारा प्रचारित किया गया कि हमने कोरोना पर विजय प्राप्त कर ली है ।

पूरे देश में अव्यवस्था का माहौल है ऑक्सीजन की मारामारी है इसके बिना दिल्ली से लेकर कई शहरों में मरीजों की जान जा रही है रेमडेसिविर  से लेकर अन्य दवाइयों की कालाबाजारी हो रही है ।निजी अस्पताल ,दवा कंपनियां आपदा में अवसर  ढूंढ रही हैं । नेताओं के पास से भी दवाइयां बरामद हो रही हैं। कोरोना वैक्सीन  राज्य सरकार को केंद्र सरकार की तुलना में अधिक कीमत पर मिलेगी, यहां तक कि विदेश से भी अधिक मूल्य पर ।यह केवल हमारे देश में ही संभव है ।आरोप लगाया जा रहा है कि राज्यों ने अपने यहां ऑक्सीजन प्लांट प्रारंभ नहीं किए । क्या यह सब करके केंद्र अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकता है  ? अभी तक जो भी बुरा हुआ और आगे भी जो भी अच्छा या बुरा होगा उसकी पूरी जिम्मेदारी सत्ता पर बैठे लोगों की ही होगी अतः आप केवल केंद्र व राज्य सरकारों की ही आलोचना कीजिए और उनसे ही सवाल पूछिए यही देश हित में होगा ।आप कल्पना कीजिए देश व राज्य की राजधानियों और बड़े शहरों में जहां स्वास्थ्य की अच्छी खासी सुविधाएं हैं, जब ऐसे हालात हैं तब छोटे शहरों गांवों और कस्बों की हालत क्या होगी । यह सचमुच डराने वाला मंजर है । शायद गांवों  में भी इस बीमारी ने दस्तक दे दी है ।मैंने और शायद आपने भी पिछले दिनों एक पोस्ट देखी होगी जिसमें कहा गया है की मीडिया केवल श्मशान घाट ही दिखा रहा है कब्रिस्तान को नहीं ताकि वह हिंदुओं को केंद्र सरकार के खिलाफ भड़का सके ।धन्य है यह  पोस्ट बनाने वाले और उसे शेयर करने वाले ।इस तरह के सैकड़ों पोस्ट आ रहे हैं दोनों ही तरफ से राजनीति में कोई कमी नहीं है ।हमसे बेहतर तो कोरोना वायरस है जो जाति,धर्म ,अमीर ,गरीब का भेदभाव नहीं करता ।क्या ही अच्छा होता कि हम सब आपसी लड़ाई भूलकर कोरोना  से ही लड़ते । 

अब इसके समाधान पर चर्चा होनी चाहिए । समाधान के निम्न उपाय किए जाने चाहिए - 

 (1) -  कोरोना  आप तक केवल दो तरीके से पहुंच सकता है - किसी  संक्रमित व्यक्ति के पास आने से और  बाहर से लाए गए सामानों के जरिए । बाहर के सामानों पर निस्संक्रामक (disinfectant  )का छिड़काव  किया जाए और उसका दो-तीन दिन बाद उपयोग किया जाए ।

(2) -  अधिकांश लोगों में कोरोना अपने परिजनों,मित्रों आदि के संपर्क में आने से ही हुआ है। अतः पूरी सावधानी बरतें और भावना में न बहें ।यदि आप सुरक्षित हैं तभी आप अपने घर वालों का भी ख्याल रख सकते हैं ।याद रखिए इसे रोकने की पूरी जिम्मेदारी हम सबकी है।

 ( 3) -  हवा से कोरोना वायरस के फैलने की बात  फिलहाल हवा में ही है । फिर भी कॉविड वार्ड के आसपास या जहां कोरोना मरीज ज्यादा संख्या में हैं वहां न  जाए । ए सी का कम से कम प्रयोग करें । 

( 4 ) - घरेलू उपाय काढ़ा , गर्म पानी, भाप ,हल्दी, तुलसी, विटामिन सी डी आदि का सेवन कीजिए ।

( 5 ) - कोरोना के इलाज में काम आने वाली दवाइयों, ऑक्सीजन आदि पर जी एस टी तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए और इसका लाभ मरीजों को मिलेगा ही क्योंकि जी एस टी में  एन्टी प्रोफिटिरिंग नियम लागू है।जब तक अत्यंत जरूरी न हो घर से बाहर न निकले ।

( 6 ) -  लोगों को लड़ाने और उत्तेजित करने वाले पोस्ट से सभी परहेज करें ।

 (7 ) -  केवल  केंद्र व  राज्य सरकारों से ही सवाल करें ।

( 8 ) -  स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना के इलाज में प्रयुक्त  दवाइयों की लिस्ट जारी किया  जाए ।छत्तीसगढ़ शासन ने ऐसी पहल की है।

 ( 9 ) -   डॉक्टर आजकल देखकर और पूछकर ही इलाज कर रहे हैं ।सभी तरह के डॉक्टर जैसे एलोपैथी आयुर्वेदिक होम्योपैथी के  सरकारी व निजी डॉक्टर इसमें सहयोग कर सकते हैं । संकट की इस घड़ी में प्रत्येक डॉक्टर 24 घंटे में लगभग 30 मिनट का समय प्रदेश के नागरिकों के लिए निकालने की कृपा करें  और फोन पर अपने राज्य के नागरिकों के लिए  उपलब्ध रहे ।जहां इंटरनेट की सुविधा हो वहां लोग वीडियो कॉल कर भी सलाह ले सकेंगे ।इस पर एक कारगर प्लान बना कर काम किया जा सकता है ।

 ( 10 ) - सभी राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सप्ताह  में एक  दिन कोरोना के हालत की समीक्षा करें और इस पर उनकी एक प्रेस कान्फ्रेंस हो । केंद्रीय स्तर पर भी यह किया जाना चाहिए ।जवाबदेही जिम्मेदारी की पहली सीढ़ी  है ।

( 11) -  दवाइयों, ऑक्सीजन, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सभी केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर काम करें ।यदि हम यह नहीं करते हैं तो हम सभी हारेंगे और कोरोना  जीतेगा ।

( 12 ) -  टेस्टिंग की संख्या बढ़ानी होगी। ट्रैकिंग भी कारगर ढंग से करना होगा । 

( 13 )  - फिलहाल सबसे बड़ा संकट कोरोना का ही है,अतः सभी राज्य सरकारें सभी नर्सिंग होम को निर्देश दे कि वे अपने अस्पताल का कम से कम पचास प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित करें । 

 ( 14 ) - मौतों के आंकड़े या अन्य किसी आंकड़ों को छुपाने की कोशिश न  की जाए क्योंकि हमें  इसका सामना करना है  न कि रेत में अपना सिर छुपाना है ।

 ( 15 ) - कोरोना वायरस से  हमारा इम्यून सिस्टम ही कारगर ढंग से लड़ सकता है , अतः इससे बचने के दो ही आसान उपाय हैं  -  संक्रमित होने से बचना  और कोरोना का टीका ।राज्य सरकारें भी जो टीका खरीदेंगे वह देश के नागरिकों के लिए ही है ।यह भी आश्चर्यजनक है कि विदेशियों को कम कीमत पर इनकी आपूर्ति की जाएगी। केंद्र सरकार व राज्य सरकारें दोनों कंपनियों पर दबाव बनाएं कि वह केंद्र के दर पर ही राज्य सरकारों को भी कोरोना टीका -  कोविशिल्ड व कोवैक्सीन की आपूर्ति करें ।टीकाकरण का कार्य युद्ध स्तर पर किए जाने की जरूरत है ।

( 16 ) - जहां संक्रमण अधिक है केवल वही तालाबंदी की जाए और जहां भी तालाबंदी की जाए वहां रोज कमाने खाने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ।

हम सभी इस बात का भरोसा रखें यह संक्रमण काल है और यह भी खत्म हो जाएगा आइए हम सब मिलकर प्रण  करें कि अभूतपूर्व संकट की इस घड़ी में हम अपने आपसी भेदभाव मिटाकर और एकजुट होकर कोरोना का मुकाबला करेंगे और उस पर विजय हासिल करके ही रहेंगे ।

 राजशेखर चौबे (Ex I.R.S. )

भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी 

295/A रोहिणी पुरम रायपुर

फोन 9425596643