लेखक बनने की चाह

क्या आप लेखक बनने जा रहे हैं।यदि हां तो यह लेख आपके लिये काफी मददगार साबित होगा।

शुरू में हमें हर काम कठिन लगता है। धीरे-धीरे हमें उसकी आदत पड़ जाती है। तब वह उतना कठिन नहीं लगता है।जितना की पहले शुरूआती दौर में लगता था। और एक समय ऐसा आता है कि वही कठिन काम हम चुटकियों में कर देते हैं अथवा हमारे बायें हाथ का खेल होता है। किसी भी नये कार्य या नयी विधा को सीखने में कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों,दिनों अथवा कभी - कभी सालों का भी सफर तय करना पड़ता है। हमारे एक सम्मानीय पाठक नें मुझसे अपनी ईच्छा व्यक्त करी थी कि विचार तो सामान्य व्यक्ति के दिमाग में भी आते हैं फिर वो अपने विचारों को अच्छी तरह से प्रकट नहीं कर पाता है। जबकि लेखक उन्हीं विचारों को अलग-अलग तरीके से व्यक्त कर देता है। और उसको एक कलाकार की भांति जैसा चाहे वैसा स्वरूप दे देता है। एक लेखक ऐसा कर कैसे लेता है।उन्होंने आगे कहा कभी समय मिले तो इस विषय पर अवश्य प्रकाश डालीये।हम अक्सर अपने पाठकों की समस्याओं और उनकी जिज्ञासाओं को अपने समाचार पत्र के माध्यम से मुख्य विषय के तौर पर आप सभी के सम्मुख लाते रहे हैं। हम पुनः अपनी मुख्य बात पर आते हैं। हम सभी इंसान हैं और इंसान होने के कारण हम सभी में मानवीय भावनाएं और अपनी कल्पना शक्ति को पंख लगाने के लिये एवं बेहतर सोचने के लिये एक खुबसूरत दिमाग भी है। और इन सबके लिये किसी के पास कम तो किसी के पास कुछ ज्यादा अनुभव भी है। यह सभी बातें सामान्यतया एक सामान्य व्यक्ति और लेखक दोनों में मौजूद होतीं हैं। फिर वह कौन सी ऐसी खूबी है जो लेखक को एक सामान्य व्यक्ति से विशिष्ट या अलग बनाती है। पहली बात तो यह है कि लगातार लेखन का कार्य करते-करते एक लेखक का शब्द कोष बहुत विस्तृत हो जाता है। इसलिये इस विस्तृत शब्दकोष के साथ उसका लेखन बहुत प्रभावी हो जाता है।क्यों कि जहां जैसी जरूरत होती है वहां वह अपने शब्दकोष में से उस तरह के शब्दों का स्तेमाल कर लेता है। और अपने शब्दों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सफल हो जाता है। वहीं सामान्य व्यक्ति जिसके दिमाग में विचार तो बहुत से आते हैं लेकिन जब लिखने बैठता है तो सही समय पर सही शब्दों का उपयोग करने से वह वंचित रह जाता है। कारण स्पष्ट है कि शब्दकोष के मामले में वह काफी पिछड़ा हुआ है या शब्दकोष से समृद्ध भी है तो कहां किन शब्दों का उपयोग करना है यह तुरंत दिमाग में नहीं आता है। किस तरह के शब्दों के स्तेमाल से अपनी बात को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है यह लिखने की लगातार कोशिश से ही संभव है। जब आप कुछ लिखते हैं तो उस समय आपका दिमाग क्रियाशील रहता है और नये-नये शब्दों की संरचना तथा नये विचारों का आगमन होता रहता है।अच्छे लेखन की विशेषता ही है कि शब्दों का संचय और उनका सही जगह पर सही तरीके से स्तेमाल करना। एक लेखक एक ही बात को अपने लेखन में भिन्न-भिन्न तरीके से प्रस्तुत कर सकता है। लेखक के शब्दकोष में बहुत अधिक शब्द होने के बावजूद भी वह कम शब्दों में अधिक प्रभावशाली तरीके से अपनी बात प्रस्तुत कर देता है। हर लेखक की अपनी एक लेखन की शैली होती है।जो उसे अन्य लेखकों से अलग दिखाती है। जो लोग लगातार पुस्तकें पढ़ने का शौक रखते हैं वह तुरंत समझ जाते हैं कि यह फलां-फलां लेखक की लेखन शैली है। कोशिश कीजिये की आपकी लेखन की भाषा शैली अन्य लेखक़ों से कुछ अलग हट कर हो। जब भी आप किसी समाचार पत्र के लिये लेख, कहानी अथवा कविता भेजते हैं तो संपादक तुरंत समझ जाता है कि आप का यह शुरूआती समय है अथवा आप शौक से लिख रहे हैं या आप पेशेवर लेखक हैं।यदि आपने ठान लिया है कि आपको लेखक बनना है तो अभ्यास और प्रयास का दामन थामें रहें। साथ ही अलग अलग क्षेत्र एवं भाषा के लेखकों के लेख पढ़ने की आदत डालें।जिससे आपका शब्द कोष विस्तृत तो होगा ही साथ ही भाषा शैली को समझने में भी मदद मिलेगी।


श्रीमती रमा निगम

 वरिष्ठ साहित्यकार भोपाल म.प्र.

 nigam.ramanigam@gmail.com 

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