पुस्तकें जीवन प्रकाशित कर आनंद उपजाती हैं : प्रमोद दीक्षित मलय

• हवन के साथ योग एवं पुस्तक अध्ययन से मिल रही शांति

बांदा। शैक्षिक संवाद मंच द्वारा आयोजित वायुमंडल शुद्धिकरण लोक अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में मंच से जुड़े शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा नित्यप्रति औषधियुक्त हवन के साथ ही योग, प्राणायाम, बागवानी और पुस्तक अध्ययन का क्रम जारी है। कोरोना काल में मानसिक शांति, सामर्थ्य एवं सम्बल के लिए संचालित अभियान में भागीदारी करने वाले लोगों में आत्मबल, सकारात्मकता एवं संकट से जूझने की आत्मिक ऊर्जा का प्रवाह हो रहा है। अभियान के एकादश बिंदुओं में से पुस्तक अध्ययन हृदय में दैवीय संपदा का विस्तार कर रहा है। 

            उक्त जानकारी देते हुए शैक्षिक संवाद मंच के संस्थापक एवं अभियान के संयोजक प्रमोद दीक्षित मलय ने बताया कि मंच रचनाधर्मी शिक्षक-शिक्षिकाओं का एक स्वप्रेरित मैत्री समूह है जो शिक्षक, समुदाय एवं बच्चों के परस्पर सहयोग से विद्यालयों को आनंदघर बनाने के काम में साधनारत है। कोरोना संकट से भयभीत एवं नकारात्मक मन हुए लोगों में आशा, विश्वास एवं सकारात्मकता के जागरण हेतु वायुमंडल शुद्धिकरण लोक अभियान 10 मई से 5 जून तक आयोजित किया गया है जिसमें प्रतिदिन हवन के साथ ही योग, प्राणायाम, आसन, बागवानी, पुस्तक अध्ययन, अनुभव लेखन एवं परिवार के साथ बैठकर निर्मल आनंद हेतु प्रेम पूर्ण बातचीत एवं खेल खेलना शामिल हैं। 

अभियान से शिक्षकों के साथ ही बड़ी संख्या में अभिभावक, बच्चे एवं अन्य लोग जुड़कर गतिविधियों में भागीदारी कर रहे हैं। पूरे प्रदेश में सदस्यों द्वारा पुस्तक अध्ययन का विवरण देते हुए कहा कि हापुड़ से ऋतु श्रीवास्तव 'मृत्युंजय' एवं रेणु देवी 'रामचरित मानस' पढ़ रही हैं। फतेहपुर से आसिया फ़ारूक़ी 'हाशिए पर धूप' एवं दीक्षा मिश्रा 'आत्म कल्याण' पुस्तक पढ़ रही हैं। रामकिशोर पांडेय बांदा गिजुभाई बधेका की 'दिवास्वप्न' , प्रमोद दीक्षित मलय 'तोत्तो-चान' एवं गाजियाबाद से नीतू शर्मा श्रीमद्भगवद गीता का पठन कर रहे हैं। वाराणसी से कमलेश पांडेय 'बरगद का पेड़' और श्रवण गुप्ता 'बच्चे की भाषा और अध्यापक' पढ़-समझ रहे हैं। बाराबंकी से मोनिका तिवारी प्रेमचंद की बाल कहानियां और आरती साहू 'रामचरित मानस' पढ़कर खुशी महसूस कर रही हैं। गौतमबुद्ध नगर से कंचन बाला कहानियों की पुस्तक एवं श्रुति त्रिपाठी बस्ती जड़ी बूटियों से सम्बंधित पुस्तक पढ़कर आनंदित हैं। गाजियाबाद से शैला राघव 'गुनाहों का देवता' पढ़ने में व्यस्त हैं। प्रमोद दीक्षित मलय ने बताया कि पुस्तकें जीवन पथ को प्रकाशित कर हृदय में आनंद उपजाती हैं। पुस्तकें सच्ची मीत हैं और मार्गदर्शक भी। पुस्तक पठन हमारी दिनचर्या का अंग बनना चाहिए।