विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो

विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो।

हर बुराई,मुश्किल से भिड़े रहो।


ज़िन्दगी दर्द की कहानी है,

हर ओर पीर की बयानी है

पर है भीतर आपके जज़्बा,

तो हर रुत सुहानी है

रुकना नहीं है,घबराकर,

आगे ही आगे बढ़े रहो।

विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो।।


चारों ओर काँटे बिखरे हैं

अपने ही अपनों को अखरे हैं

कहीं आतंक है,कहीं मातम है

क़दम-क़दम पर मिलता ग़म है

बुरे दिनों के सिर पर चढ़े रहो।

विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो।।


झूठ,कपट,छल हँसता है

जो सच्चा है,जाल में फँसता है

अँधेरों के चेहरों पर मुस्कान है

अमन-चैन का हुआ,अवसान है

थककर नहीं बैठो,खड़े रहो।

विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो।।


ज़िन्दगी एक उपहार है

मुहब्बत है,प्यार है

 मायूसी को सदा दूर रखना है

सुख के अहसास का फल चखना है

साहस लेकर मंज़िल के पीछे पड़े रहो।

विश्वास है गर ख़ुद पर,अड़े रहो।।


 --प्रो(डॉ)शरद नारायण खरे

प्राचार्य

शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय

मंडला(मप्र)-481661

(मो.9425484382)