॥ लज्जा ॥

लज्जा नारी की श्रृंगार है

लज्जा नारी की संस्कार है

लज्जा नारी में होती है वास

खुशी उनका घर द्वार है


लज्जा से नारी का सम्मान है

लज्जा ही नारी की पहचान है

लज्जा नारी की खुशबू है

लज्जा नारी की   कुदरत है


घूंघट में नारी जब दीख जाती है

लज्जा में सुन्दर वो लगती है

लज्जा नारी संस्कार की पहचान है

भारतीय नारी की लज्जा शान है


नारी प्रकृति ही लज्जा है

लज्जा बिन नारी ओछा है

नारी को दिलाती सम्मान है

निर्जलता नारीत्व का अपमान है


उदय किशोर साह

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