वृक्षारोपण

बना दी बंजर सी धरती,

फैला हुआ है बीहड़।

सांस ले कहाॅं से मानव,

पैर पसारे प्रदूषण।

गाडी़, मोटर, चिमनी सब,

धूआँ उडा़ये जाती है।

शुद्व वायु मे मानो,

जहर मिलाये जाती है।

अब भी गर ,

जो किया विलम्ब।

खुली हवा का,

न ले सकेंगे आनन्द।

सताया धरा को,

किया प्रहार प्रकृति पे।

नतीजन जूझ रहा,

समस्त संसार विकृति से।

बस अब बन्द करो,

प्रकृति का शोषण।

सब मिल संकल्प ले,

आज से करे,

वृक्षारोपण।

  

चारू मित्तल