"क्या अब इंसान सुधर जाएगा"

स्वार्थ, लालच, अहं, वैमनस्य, इर्ष्या, मुनाफ़ाखोरी, रिश्वतखोरी, चोरी, अभिमान, बड़बोलापन, हिंसक स्वभाव, बदले की भावना, किसीको सुनाने की वृत्ति, सामने वाले की ही गलती देखना, खुद को महान समझना, किसीको नीचा दिखाना, गाली गलोच करना, दंगे फ़साद की वृत्ति, देश में अराजकता फैलाना उफ्फ़फफफ ये तो चंद है ,और कितने अवगुणों की खान है इंसान।

ईश्वर जब एक जीव को ज़िंदगी की बावड़ी में बहाता है अपने हाथों से तब जीव सर्वांग सुन्दर निश्चल, निर्मल ईश्वर का अंश होता है। लेकिन संसार पर पैर धरते ही दो खतरनाक चीज़ों से जीव का मिलन होता है, "मोह और माया" जो जीव को ऐसे लिपटती है कि इंसान इंसान नहीं रहता वो सारे दैवीय गुण विलुप्त हो जाते है, और भूल जाते है की असल में कौनसे मकसद से धरती पर आए है।

संसार सुंदर है, जीवन उपवन है हमें फूल की तरह खुश्बूदार, पवित्र और हृदय से कोमल रहकर ज़िंदगी का सफ़र काटना होता है। अपनापन, भाईचारा और सेवाकिय प्रवृत्ति से एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए। ताकि मृत्यु पश्चात उसी ईश्वर के चरणों में जगह पा सकें। पर नहीं हमने दिमाग को षड्यंत्र का मशीन और गोबर सा गंदा और बदबूदार बना लिया है, और संसार को बुराईयों का दलदल बना दिया है।

ऐसी महामारी और कुदरती आपदाओं द्वारा ईश्वर हमें हमारी गलतियों से अवगत कराते ही रहते है। पर इंसान उसमें भी अपने मुनाफ़े का जुगाड़ ढूँढने में लग जाता है, इंसानियत को बेच खाता है। ये सारी महामारीयां और कुदरती आफ़त छोटी-छोटी नोटिस होती है उपर वाले की ओर से, की सुधर जाओ इससे पहले की महाकाल का तीसरा नेत्र खुले और ज़लज़ला सबकुछ बहाकर ले जाए।

कई लोग मानते है कि ईश्वर या भगवान जैसा कुछ नहीं होता, पर बस एक बार सोचो खाते है हम मुँह से जैस-तैसे चबाया निगल लिया उसे पचाकर खून बनाकर रग-रग में बहाकर नखशिख पहुँचाने की प्रक्रिया ईश्वर है, क्या कोई लेबोरेट्री खून बना सकती है? खेतों में एक दाना बोते हो उस एक में से असंख्य दानों का उत्पन्न होना ईश्वर है। कई बार भयंकर एक्सिडेंट से भी कोई उभर जाता है वो ईश्वर की ही मर्ज़ी और कृपा है। अच्छा है ईश्वर दिखते नहीं वरना इंसान भगवान को भी आम समझ कर लताड़ना नहीं चुकता।

जहाँ साँस-साँस छूट रही हो, जहाँ हर घर से अर्थीयां उठ रही हो ऐसी परिस्थिति में भी अगर इंसान लालची बनकर इमान बेचकर मुनाफ़ा कमाने की सोच रहा हो उस मानसिकता को क्या कहेंगे। ना, नहीं सुधरेगी इंसानों की फ़ितरत और जब तक इंसान लोभी वृत्ति से लिपटा रहेगा ईश्वर ऐसी नोटिस देता रहेगा जिसमें हर एक को पीसना पड़ेगा।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु