36 वर्षों से धूना तप रहे सेवादास महाराज

राकेश बाबू/पीलीभीत : हिंदू धर्म में चार युग बतलाए गए हैं जिनमें सतयुग त्रेता युग द्वापर युग और कलियुग। हिंदू धर्म के अनुसार  पृथ्वी पर मनुष्य जीवन काल की शुरूआत सतयुग से प्रारंभ हुई। इस युग से ही संत महात्माओं ने तपस्या की नींव रखी । उस समय मनुष्य एकांत में सैकड़ों वर्षो तक तपस्या करते थे। तप से ही वह दैवीय शक्तियों का आवाहन करके संपूर्ण ब्रह्मांड के कल्याण के लिए हुआ उनका सहयोग लेते। तीन युगों का लंबा समय बीत जाने के बाद आज तपस्या का महज समय और स्वरूप बदला है। 

जेष्ठ माह में सूरज की किरणों की तपन को हम लोग सहन नहीं कर पाते वही टाइगर रिजर्व की माला रेंज के बीचो-बीच स्थित सिद्ध बाबा देव स्थल के पुजारी सेवादास महाराज धूना (आग)तप रहे हैं।वह पिछले 36 वर्षों से धूना लगाकर तप कर रहे हैं। सेवादास बाल अवस्था से ही धूना तप रहे हैं।धूना तप प्रत्येक वर्ष के बसंत पंचमी से शुरू होकर जेष्ठ माह के दशहरा( गंगा स्नान) तक चलता है। बसंत पंचमी और गंगा दशहरा दोनों शुभ अवसरों पर प्रतिवर्ष  सिद्ध बाबा देव स्थल पर विशाल भंडारा का आयोजन किया जाता है।

पीटीआर में स्थित है तपस्वी बाबा का आश्रम

श्री महावीर दास महाराज के गुरु बनखंडी बाबा थे जो मूल रूप से शाहाबाद के निवासी थे जो जिले के माला जंगल में आकर रहने लगे। बनखंडी बाबा से तप करने का ज्ञान महावीर महाराज ने लिया। जो बाद में तपस्वी बाबा कहलाए जिनका आश्रम पीटीआर में स्थित है वही बनखंडी बाबा आज भी सिद्ध बाबा के नाम से प्रख्यात है।

ऐसे समझें

बनखंडी बाबा (सिद्ध बाबा) इनके शिष्य महावीर दास (तपस्वी बाबा) इनके शिष्य प्रेमदास उर्फ मुगरिया दास इनके सेवादास महाराज

बाबा प्रेमदास के तीन शिष्य आज भी करते हैं तप बाबा प्रेमदास उर्फ मुगरिया दास के वैसे तो अनगिनत शिष्य है लेकिन तीन शिष्य धूना तपते हैं जिनमें सेवादास रिछोला आश्रम सिद्ध बाबा देव स्थल के पुजारी, पूरन दास बिठौरा सीताराम मंदिर के पुजारी और मंगलदास  दरिया नाथ आश्रम खटीमा उत्तरांचल।