बेवजह तुम्हें याद करती हूँ

मैं जानती हूँ तुम मुझे प्रेम नहीं करते,

कोई वजह भी नहीं कि तुम मुझे प्रेम करों।

पर मैं तुम्हें बहुत प्रेम करती हूँ,

वजह नही है बेवजह करती हूँ।


मैं जानती हूँ तुमने मुझे कभी याद नहीं किया,

कोई मतलब भी नहीं कि तुम मुझे याद करों।

पर मैं तुम्हें हर पल याद करती हूँ,

मतलब नहीं है ,बेमतलब ही करती हूँ।


मैं जानती हूँ कभी पलकें नही भीगी तेरी मेरे लिए

कोई कारण भी नहीं कि पलकें भिगाओ मेरे लिए।

पर मैं अहर्निश बहती रही तेरे लिए

कारण नही है बेकारण बही तेरे लिए।

      

मैं जानती हूँ मैं प्रीत नही हूँ कान्हा तेरी

ना राधा ना रुक्मिणी ही हूँ तुम्हारी

मैं वृंदा की तरह तेरा नाम रटती रही

तुम निश्छल, निस्वार्थ प्रीत हो कान्हा

बेवजह ही तुम्हें याद करती रही।


कवयित्री :-गरिमा राकेश गौतम

पता:-खेड़ली चेचट कोटा राजस्थान