एम पी एल खेल की आदत युवा वर्ग के लिए घातक हो सकती

आज हमारे भारत देश मे एक आनलाइन खेल का खूब प्रचार हो रहा है और वो खेल है एम पी एल आनलाइन खेल।जिसका खुले आम प्रचार कर इससे होने वाले खतरे,नुकसान के लिये भी पहले से ही सचेत किया जा रहा है और ये आदत,खतरा है आर्थिक हानि की लत।आज जब देश बहुत बड़े आर्थिक संकट से गुज़र रहा है,जहां भयावह महामारी के चलते लोगों की दुकाने बंद हैं आर्थिक कमाई का कोई जरीया नहीं,घरों मे पहले की बचत से घर चलाने की नौबत आ गई है और अब तो हर घर की लगभग बचत भी समाप्त होने पर आई है।ऐसे मे ये एम पी एल गेम कहां तक सभी के लिये उचित है।ये तो ऐसा लग रहा अभी के महामारी के समय मे की पहले ही जहां लोग जूंझ रहे,मर रहे आर्थिक तंगी से ऐसे मे आओ और लोगों को ओर भी अधिक कुंए मे जानबूझकर धकेलना जैसा लग रहा है।

     आज बच्चों, बुजुर्गों से लेकर हर एक युवावर्ग भी कोरोना महामारी मे लाकडाऊन के चलते हर कोई फुर्सत के क्षणों मे घर पर ही कैद हो समय व्यतीत कर रहा है।हर कोई इन फुर्सत के क्षणों मे वक्त काटने के लिये टेलीविजन देख,अखबार की खबरे पढ़,तो कुछ मोबाईल पर,तो कुछ सोशल मिडिया पर तरह-तरह के विडिओ देख कर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं।ऐसे मे सोशल मिडिया पे ऐसी बहुत सी साइट हैं जहां तरह-तरह के गेम भी हैं जो की मुफ्त हैं परंतु ऐसे ही समय मे अब सोशल मिडिया के जरीये पैसों से खेलने वाले एक खेल का हर एक चैनल पर प्रचार देखने को मिल रहा है और उस खेल का नाम है। एम पी एल खेल जिसका  प्रचार प्रसार का चलन आज निकल चला है विज्ञापन के साथ और उसमें सतर्क भी रहने को करते नजर आ रहे की इसमें पैसों से खेलने की लत लग सकती है।आप अपनी जिम्मेदारियों पर दिमाग संग खेलें।क्या इस महामारी के समय ये ऐसे खेल को बाजार मे लाना किस हद तक उचित है?क्या ये खेल हर एक उस अभिभावक के लिये मुसीबत नहीं बन सकती जो बहुत ही बुरी तरह आर्थिक तंगी से जूंझ रहे हैं।ये एम पी एल आनलाईन आर्थिक मदद से खेली जाने वाली वह खेल है जो कि यदि देखा जाऐ,सोचा समझा जाऐ तो एक तरह का सट्टा,जूंआ सा नजर आ रहा है।यदि सोचिये की इन फुर्सत के क्षणों मे युवा वर्ग इस एम पी एल खेल को खेलते रहे तो छोटी उम्र मे बहुत ही बुरी लत के आदी हो सकते हैं।जैसे एक सट्टा इंसान को लाभ दिला के उसे ओर भी अधिक लालची बना देता है ठीक उसी तरह एम पी एल आनलाईन खेल भी बच्चों,युवावर्ग को एक दो बार की विजय के बाद लालची बना सकती है।यदि ये एक बार हार गये तो विजयी होने की आस मे पुनः पैसा लगा अपना आर्थिक नुकसान बहुत बड़े पैमाने तक कर सकते हैं।आज हर एक इंसा बहुत बुरी तरह आर्थिक तंगी की मार झेल रहा है,बहुत से घरों मे तो चुल्हा भी ना जला होगा,बहुत से ऐसे लोग होंगे जो रोज कमाओ और रोज खाओ जैसी हालात से गुज़र रहे होंगे।फिर ऐसी भयानक महामारी, आर्थिक तंगी के बीच इस तरह का आनलाइन खेल सोशल मिडिया पर आना कहां तक सही है।जैसे एक शराबी को शराब की लत लग जाती है ठीक उसी तरह ये खेल की लत भी लग सकती हर वर्ग के लोगों को।इस समय आर्थिक सम्स्या से जूंझ रहे केवल भारत देश के ही नागरिक नहीं बल्कि पूरे विश्व भर के लोग ऐसी परिस्थितियों मे इस तरह के आनलाईन खेल को रोकना चाहिये।ताकी इन फुर्सत के क्षणों मे युवावर्ग अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए समझदारी का परिचय दे।साथ ही अपनों के साथ वक्त बिता हसते-खेलते सभी की आपदा से लड़ने की हिम्मत बढ़ाता रहे।ना की इस विपदा की घड़ी मे ऐसी आनलाइन खेलों को खेल अपने परिवार की पहले से चल रही विपदाओं मे इज़ाफ़ा करे।ये घड़ी इस समय सभी के साथ और सभी संग मिल पुनः विकास की है।कुछ वर्षों से चल रहा सोशल मिडिया पर आनलाइन खेल पब्जी ने वैसे ही बच्चों को ऐसी बुरी लत लगा दी की उसमे डूब गये साथ ही बहुत से बच्चे डिपरेशन का शिकार हो आत्महत्या कर ली।आप सभी बच्चों, युवावर्ग चाहे किसी भी वर्ग के लोग हों उन्हें इस तरह के किसी ही आनलाइन खेल को सोशल मिडिया के जरिये नहीं खेलना चाहिये जिसमें उनका हित नहीं सिर्फ़ और सिर्फ़ अहित समाया हो।अपने परिवार मे इस समय सभी को सभी के साथ और हिम्मत की जरुरत है।साथ ही जिम्मेदारी को समझते हुए आर्थिक बचत और सहयोग की भी जरूरत है।

वीना आडवानी"तन्वी"

नागपुर, महाराष्ट्र