हाय रे चोरी!

जीवन रक्षक दवाओं की एक बड़ी खेप।

उचित जगह जब ना पहुंची हो गई लेट।

मचा चतुर्दिक हल्ला-गुल्ला,

कहने लगे राजनीतिक पुजारी पंडित मुल्ला।

मानो जैसे जनता के हमदर्द हैं असली।

बाक़ी सब हैं पोंगा पंडित बिल्कुल नकली।। 

आग बबूला  होकर हरकत में ,

आई योगी बाबा की सरकार।

सोलह आना समझ बैठी,

मुनाफा खोरी की दवा हुई शिकार।।

 जांच की आंच पहुंची, निचली सतह तक।

जान गया बूढा-बच्चा,

नौजवान भी असली हकीकत।।

एक तरफ कोरोना का कहर,

दुसरी तरफ मुनाफा खोरी।

सुनकर कहीं खिसकती धोती,

कहीं ढील होती पाजामा की डोरी।हाय रे चोरी!

गौरीशंकर पाण्डेय सरस