एक नजर इधर भी

जस जस चुनाव के ,

तारीख नियरात बाटे।

ओटरन के हालचाल,

खेत ले पूछात   बा।

दुआ आ सलाम जे,

कबों ना करत रहे,

उहो दूनो हाथ जोड़ले,

दूर से देखात बा।।

कुछ के त पैसा के,

गरमी बा एतना की,

शादी आ विआह नियन, 

पैसा छिंटात बा। 

ओरियेतर गंगा में,

डुबकी लगावे बदे,  

धोती आ सारी,

खुबे खूब खुटियात बा।।1। ।

शीशी के फेरा में त,

मुखिया से मिलि  रोज, 

राति क डोज लेके

हरारत मेटात बा। 

144 धारा ,

आचार संहिता भी लागू बाटे,

मोटू सेठ के ना डर,

तनिको बुझात बा।

चट्टी चौराहे पर ,

पुलिस के चेकिंग में,

पेंटी क दारू ,गांजा, 

बोरा क धरात बा।

 चासनी चुनाव क,

चरचा बनल बाटे ,

हालत खराब खाना

नईखे घोटात बा।।2।। 

गौरीशंकर पाण्डेय सरस