मौत का कारण यदि कोरोना निकल गया

इतना गुरुर क्यों है,किस रुआब ढल गया।

अब तो मौत का, सलीका भी बदल गया।


मौत का कारण यदि,कोरोना निकल गया।

मिलते नहीं हैं शव भी,विद्युत से जल गया।


न तुलसी दल मिलेगा,न गंगाजल मिलेगा।

कफ़न न ये मिलेगा,पैकिंग में शव मिलेगा।


कन्धे का न सहारा,न अर्थी उठान विश्राम।

न राम राम सत्य है,सब की यही गत्य राम।


न घर वाले ये साथ हैं,न साथ हैं दोस्त यार।

वह भी साथ है नहीं,जिसको किये थे प्यार।


जिनके लिए जहाँ में, जीते जी थे तुम लड़े।

वो भी नहीं दिखे न आगे,खड़े न पीछे खड़े।


गजब का दौर आया,जो बीमार वो अकेला।

बीमार वो नहीं होगा,जो रहेगा सदा अकेला।


ये कोरोना भी ऐसी शै है,पीछा न छोड़ता है।

नया स्ट्रेन जो अब है,किसी को न छोड़ता है।


इससे बच कर रहना, सामाजिक दूरी रखना।

मास्क ये लगायें,बीमारी हॉस्पिटल से बचना।


मौत यह कोरोना से हुई,ना पायेगा कोई जान।

कोरोना रोधी पैकिंग में,जायेगा सीधे श्मशान।


कब जायेगा ये धरा से,भारत जब मुक्त होगा।

हर नागरिक शायद, जब वैक्सीन युक्त होगा।


अब तो आ गई है,कोविशिल्ड व को वैक्सीन।

जाओ लगवाओ भइया,लग रही फ्री वैक्सीन।


रचियता :

डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव

वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

इंटरनेशनल चीफ एग्जीक्यूटिव कोऑर्डिनेटर

2021-22,एलायन्स क्लब्स इंटरनेशनल,प.बंगाल

संपर्क : 9415350596