गाँव गलियारेन में,शहर और दुआरेन में।

गाँव गलियारेन में,शहर और दुआरेन में।

जातिगत दानव नै,कहर बरसायौ ऐ ।।

हा हा पुकारैं सब ,निबल निरीह प्रानी।

नेतन के चेतन नैं ,देश झुलसायौ ऐ।।

तात मात भाई बन्धु,कोऊ न पुकार सुनै।

व्यक्तिगत स्वारथ नै, मन भरमायौ ऐ।।

धरती सौं अम्बर लौं ,आग विद्वेषन की।

संविधान शिल्पी ,सिर धुनि पछतायौ ऐ।।

                                  देवयानी भारद्वाज

                                 उसायनी फीरोजाबाद