एक प्रबंधक की आह ----

करोना के बढते प्रकोप से सरकार एक बार फिर स्कूल कालेजों में छुट्टी कर दी। ऐसे में जो छोटे स्कूल कालेज है जिनकी इसी संस्था से रोजी रोटी चलती थी और जो प्रबंधक स्कूल के लिए गाडिय़ां फाइनेंस करवाए थे व नीजी जरूरी खर्च किया करते थे। उनके बारे मे सरकार क्या सोचती है। पिछले लाक डाउन में कोई फीस नहीं मिला। टीचरों को घर से कुछ महिने दिया गया। जब देखा कि समस्या बढती जा रही है तो उन्हें भी मजबूरन निकालना पडा। इस बार स्कूल का नया सत्र शुरू हुआ सोचा अब कुछ अच्छा होगा। काफी मेहनत करके गांव गांव गली-गली घर घर जाकर प्रचार किया। जब बच्चों का एडमिशन की बारी आयी तो एक बार फिर वही कहानी सामने आ गयी। ऐसे में एक प्रबंधक की पीड़ा को देखिए और हो सके तो कोई रास्ता निकालिए। 

प्रबंधक जो कि वित्तविहीन अधिनियम 7 क के तहत मान्यता लिया है। जिसने शपथ पत्र दिया कि हम अपने खर्च पर विद्यालय का संचालन करेंगे । लेकिन खर्च कहाँ से लाये । विद्यालय बंद हो जाने के  कारण छात्र छात्रा की पढ़ाई नहीं हो पा रही है, न ही फीस जमा हो रही है । प्रबंधक भीख भी मांगे तो किससे? जिनके द्वारा विद्यालय के छात्र छात्राओं की शिक्षा दीक्षा चल रही है। वे तो भुखमरी के कगार पर है। वे हैं अधयापक व अधयापिका। मैं मानता हूँ कि कोरोना महामारी फैली हुई है। लेकिन एक आदर्श राजा वही माना जाता है जो कि विपत्तियों में प्रजा का ध्यान रखें। लेकिन राजा को कानून का पालन करवाना जरूरी है। जनता भूखी मरे लेकिन शासन की आज्ञा का पालन करें ।एक  भूखा कोई नियम नहीं जानता। पहले पेट की भूख को मिटाये , यदि उसके बीबी बच्चे और उसकी भूख राजा शान्त नहीं कर सकता है। तो वह निर्दयी है। लाकडाऊन में हम लोगों की खबर भी नहीं ली गई सहायता तो दूर की बात है। विद्यालय की बिजली बिल भी माफ़ नहीं हुई बल्कि कनेक्शन काट दिया गया। कि शासन का आदेश है। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या यही अच्छे दिन हैं? कितने प्रबंधकों की और अधयापक अधयापिकाओ की आंसुओं और उनके आहो पर शासन चलेगा । एक प्रबंधक जो पूँजीपति नहीं है, रात 9-10 बजे तक टयूशन कोचिंग पढा कर विद्यालय खड़ा किया है उसकी आत्मा से पूछा जाय कि अब वह क्या करे,उसका हर्ट फ़ेल होगा फिर उसके बीबी बच्चो को शासन कौन सी पेसन देगा जिससे उसका परिवार जीवन यापन करेंगे । हम लोग मॅहगाई , की मार झेल ही रहे हैं,ऊपर से बेरोजगारी कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है ।

संतोष कुमार श्रीवास्तव /पूनम श्रीवास्तव