दहेज

कुछ तो शर्म करो, दहेज के लोभियों ,

दहेज नहीं, यह जज्बातों का सौदा है |

लड़की के परिवार से दहेज मांग करना ,

विवाह नहीं , यह तो समझौता है ?


दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध है ,

इसे लेने वाले नरक के भागीदार हैं |

लेने वाले तो ऐश-अो-आराम में जीते हैं ,

पर देने वालों का सब कुछ चला जाता है |


लेकर दहेज क्या तुम खुश रह पाओगे ?

कैसे उस बूढ़े बाप की आँसू पोंछ पाओगे ?

बेटी धन तो वे पहले हीं दे चुके होते हैं ,

उसके घर का चुल्हा-चौका भी बुझ जाता है |


कौन सा कर्ज होता है बेटियों पर ,

जो आजीवन चुकता हीं नही  ?

दहेज के लिये पल-पल सताना ,

क्यों यह कुप्रथा मिटता हीं नहीं ?


तुम्हारी भी तो बेटियाँ होगी,

क्या उसे भी दहेज की भेंट चढ़ाओगे ?

अपनी फूल सी नाजुक बच्ची को ,

क्या दहेज की आग में जलते देख पाओगे ?


विडंबना देखिए इस समाज की ,

जो बेटियों को बोझ समझते हैं |

उन्हें पढ़ने लिखने की उम्र में ,

दहेज लोभियों की भेंट चढ़ाते हैं |


बेटियाँ बोझ नहीं, जब यह बात समझ जाओगे ,

पढ़ा लिखाकर उसे ,जब आत्मनिर्भर बनाओगे ,

फिर वह भी माँ-बाबा का, नाम रौशन कर जायेगी,

तो कहो फिर क्यों , दहेज देने की नौबत आयेगी ?


कमला सिंह 'महिमा '

खोरीबाड़ी, पश्चिम-बंगाल |

7602365257