मेडिकल संसाधनों की कालाबाजारी - आपदा में अवसर पाना मानवता पर कलंक

गोंदिया - भारत में फैले तीव्रता से कोरोना संक्रमण को देख और मेडिकल संसाधनों की अत्यंत कमीसे जूझते भारत की सहायता करने मानवीय दृष्टिकोण से संपूर्ण विश्व आज भारत की ओर दौड़ पड़ा है और तात्कालिक तीव्रता से संसाधन उपलब्ध करवा रहा है। उल्लेखनीय है कि भारत में अति तीव्रता से कोरोना संक्रमण फैलने से उपलब्ध संसाधनों की अत्यंत कमी हो गई थी और माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन, जापान के प्रधानमंत्री और बुधवार दिनांक 28 अप्रैल 2000 21 को रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने माननीय प्रधानमंत्री से वार्ता की और विश्व के अनेक देशों अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, दुबई, कुवैत, इजराइल, सिंगापुर इत्यादि अनेक देशों ने अनेक मेडिकल संसाधनों को उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया है और उम्मीद है बहुत जल्द ही स्थिति काबू में आ जाएगी..बात अगरहम भारत में मेडिकल संसाधनों की कालाबाजारी की करें तो ऐसे अनेक मामले अनेक शहरों में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से दिखाएं, हिडन कैमरे में कैद कर घटनाएं दिखाई गई है कि कुछ लोग मानवता के नाम पर कलंक आपदा में अवसर को खोज कर मेडिकल संसाधनों की कालाबाजारी में व्यस्त हैं मेडिकल अस्पताल में बेड उपलब्ध कराने, वेंटिलेटर उपलब्ध कराने, ऑक्सीजन इत्यादि अनेक मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भारी-भरकम शुल्क वसूल रहे हैं या फिर घरों गोडाउन में आक्सीजन सिलेंडरों की अवैध जमाखोरी कर मरीजों के परिजनों को कालाबाजारी कर भेज रहे हैं। वहां कुछ मामले ऐसे भी मीडिया ने दिखाए जा रहे हैं यहां एंबुलेंस उपलब्ध कराने पर भी अब कालाबाजारी शुरू हो गई है, अनेक मामलों में अस्पतालों के कर्मचारी भी मामललों में सलग्न  दिखाए गए हैं खासकर अस्पतालों से इंजेक्शन चोरी कर उसकी कालाबाजारी के मामले में। हालांकि इस समस्या के से निपटने के लिए हर राज्यका शासन प्रशासन चुस्त-दुरुस्त और सचेत है हो गया है और अनेक जगहों में रेड मारकर संबंधित दोषियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की जा रही है, जो टीवी चैनलों पर दिखाया जा रहा है। कुछ लोगों ने इस आपदा की घड़ी को मुनाफाखोरी का अवसर मानकर अपनी गैर मानवता पूर्णा हरकतों को शुरू कर दिया है। बुधवार दिनांक 28 अप्रैल 2021 को माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय में एक वकील द्वारा भी आरगुमेंट के समय कालाबाजारी के संबंध में अनेक बातें कही। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो ऐसी कालाबाजारी करने वालों के ऊपर एनएसए लगाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं जो अन्य राज्यों द्वारा भी प्रेरणा लेकर इसका अनुसरण किया जाना चाहिए। हालांकि इस अभूतपूर्व विपत्ति की घड़ी में पूरा विश्व एकजुट होकर भारत की मदद करने हाथ बढ़ाया है। अनेक समाज सेवा संस्थाएं, संगठन, एनजीओ सहित सेवाभावी कॉरपोरेट्स, सेलिब्रिटी और आमइंसान तक भी आगे आकर तन मन धन से सेवाएं दे रहे हैं। पूरे कोरोना वारियर्स दिन रात सेवा में जुड़े हुए हैं। परंतु इन आपदा में अवसर तलाशने वाले अमानवीय व्यक्तियों पर समाजसेवी संस्थाओं और व्यक्तियों को भी चाहिए कि इन पर कड़ी नजर रखे। इन के कृत्य की सूचना पुलिस को देकर और ऐसे लोगों का समाज में बहिष्कार कर एक मिसाल कायम करें ताकि भविष्य में कोई ऐसा आपदा में अवसर की हिम्मत ना कर सके। आज सारा देश अपने अपने ढंग से देश की सेवा करने में जुटा हुआ है। जैसे सिरम इंस्टीट्यूट (एसआईआई) ने कोविशील्ड की कीमत में 25 प्रतिशत की कमी कर दी है और राज्यों को अब 400 के स्थान पर 300 रुपए में आपूर्ति करेंगे प्रधानमंत्री महोदय ने पीएम केयर्स फंड से डीआरडीओ की मदद से 500 मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट बनाएगा और 1 लाख़ ऑक्सीजन कंस्ट्रक्टर बनाए जाएंगे ऐसी जानकारी माननीय प्रधानमंत्री ने ट्विटर हैंडल से है और कहा कि ऐसे कदमों से कुछ हद तक ऑक्सीजन की कमी दूर होगी उल्लेखनीय बात है कि हांगकांग, कुवैत और भूटान जैसे देशों ने भी मदद का हाथ आगे बढ़ाया है और 40 टन भेजा है। उधर डब्ल्यूएचओ ने भी भारत के इस आपदा की घड़ी में हाथ आगे बढ़ाएं हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी कहा है कि भारत ने सबकी मदद की है और अब भारत को मदद करने की बारी है। संयुक्तराष्ट्र (यूएन) ने भारत में बढ़ते संक्रमण के मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है संयुक्त राष्ट्र की 75 वीं आम सभा में प्रेसिडेंट वोल्कान बेजकिर ने तो यहां तक कहा कि भारत ने मुश्किल समय में पूरी दुनिया को वैक्सिन और अनेक दवाइयां दी है और अब दुनिया की बारी है कि भारत की इस विपत्ति की घड़ी में सहायता करें। इस बीच संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अपने "एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला के जरिए भारत को यथासंभव मदद की पेशकश की और कहा भारत खुद को मजबूत कर रहा है। हमें बताया गया अभी इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि भारत को तार्किक रूप से अपनी प्रणाली को स्थिति से निपटने के लिए मजबूत करना है। लेकिन हम अपनी की गई पेशकश पर कायम हैं। ऐसे वक्तव्य यूएन ने दिए हैं। भारत की इतनी गहरी प्रतिष्ठा और मानसम्मान वैश्विक स्तर पर है और यहां भारत के चंद कालाबाजारीयों, आपदा में अवसर तलाशने और जनता को परेशान करने, लूटने, मानवता की हत्या करने वाले और मानवता पर कलंक इन कालाबाजारीयों को चाहिए कि अस्पतालों में जाकर मरीजों को तड़पते और उनके परिजनों को रोते बिख़लते और परेशानियां में देखें तो उनका मन पसीज जाएगा।फिर अपने हृदय और मन से पूछें कि क्या वह सही कर रहे हैं? मेरा निजी मानना है कि और कोई देखे ना देखे, पर ऊपरवाला सभ देख रहा है। इस आपदा में अत्याचार करने वालों का हिसाब ऊपर वाले की अदालत में जरूर होगा और उनको इसी योनि में उसका कई गुना फल भुगतना होगा। यह आध्यात्मिक बात इस लेख के माध्यम से अगर कालबाजारी करने वाले समझ जाएं और कालाबाजारी, मुनाफाखोरी छोड़ दें तो सुबह का भूला शाम को घर लौटा, देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत कारगर सिद्ध होगी और उनको मानवता की लाज बचाने के एक मौके में कामयाबी हासिल होगी और आगे की जिंदगी सफलता और चैन से गुजरेगी।

-संकलनकर्ता लेखक- कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र