दाता रहम करना

अरे ओ दाता रहम करना

तू तो सभी को बनाता है।

तू ही जगत को बनाता है

तू ही जगत को मिटाता है।

न तो तू कागज लगाता है

ना तो तू कलम लगाता है।

तू बिन कागज और कलम के

सारा हि हिसाब लगाता है।

शांति भी तू ही बनाता है

फिर क्यों शांति तू मिटाता है।

तेरे बालक है हम सब ही

क्यों तू हमें ही रुलाता है।

राई को पर्वत बनाता है

पर्वत को राई बनाता है।

रंक और राजा बनाता है

तू अपनी कृपा दिखाता है।

मिटा दे तू जहाँ कोरोना

तू संकट सभी मिटा प्रभु यहां।

क्या गलतियों की है यह सजा

पर प्रभु तू न हमसे रूठना।

सकल ज्ञान से झोली भरना

तू ही जगत बुद्धि बनाता है।

बुद्धि से ही संसार चलता है

कुबुद्धि से संसार मिटता है।

तेरे बालक है हम सब ही

प्रभु तू ही सृष्टि बनाता है।

अरे ओ दाता रहम करना

तू तो सभी को बनाता है।

पूनम पाठक बदायूँ