तब और अब

यह बात उन दिनों की है जब मैं कक्षा आठ  में पढ़ती थी और मेरे विद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम तो हुआ ही करते थे ।  सांस्कृतिक कार्यक्रम जो बच्चे किया करते थे उनको ही पता होता था कि कौन से कार्यक्रम हो रहे हैं ।इसके अलावा किसी भी बच्चे को कुछ  पता नहीं होता था ।जिस दिन कार्यक्रम होते थे उसी  दिन पता चलता था कि आज कार्यक्रम हैँ ।लेकिन एक बार मेरे विद्यालय में स्काउट गाइड का कैंप लगा जिसमें कि सभी ने भाग लिया ।जिसमें कक्षा छ :, सात , आठ  की पूरी कक्षा के सभी छात्राओं  ने भाग लिया। उसमें  अंतिम दिन में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम होना था ।इसके साथ-साथ बच्चों का मेला लगता था जिसमें बच्चे कुछ चीजें बनाते थे और उनको अगर कोई खरीद लेता था तो उन बच्चों को बेहद खुशी होती थी । अब जिस  दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होने थे उस दिन अध्यापिका जी ने  कहां, "एक हास्य कवि सम्मेलन हो रहा है।  एक लड़की कम है क्योंकि वह लड़की आज बुखार आने की वजह से नहीं आ पाई है ।क्या तुम उसको बोल सकती हो? " फिर मैंने कहा, " जी मैडम मैं कोशिश करती हूं। मैं अब बोल पाऊंगी या नहीं । "

फिर मैंने उसको देखा कि क्या बोलना है ।एक दो बार पढ़ा और उसका अभ्यास  कर लिया ।अब सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए। कार्यक्रम में  बाहर के अतिथि गण भी आए ।और विद्यालय के भी सभी लोग मौजूद थे । कई कार्यक्रम हुए ।हास्य कवि सम्मलेन में

जो मैंने बोला था वास्तव में मैं उससे बिल्कुल अनजान थी ।

सभी को  हंसाने के लिए बारी बारी से जो बच्चे कवि बने हुए थे। उन्होंने कविता गाईं ।

मेरी बारी आयी और मैंने बोला,

" साँचि कभी मत बोलिए

बोल दीजिए झूठ

झूठ ही से परत है

धन - धान्य ने की लूट

धन -धान्य की लूट

बात मेरी मानो यारो

ब्लैक मार्केटिंग से

दुनिया को भूखा मारो।।

कवि सम्मलेन समाप्त हुआ ।तालियां बजीं ।पुरस्कार भी मिला ।

उस वक्त तो इसका कोई अर्थ नहीं निकाला और उसको बोल दिया । बोलने में अच्छा लगा लेकिन धीरे-धीरे वक्त गुजर गया। लेकिन वह  कवि सम्मेलन  विद्यालय में मेरा पहला और अंतिम कार्यक्रम था ।इस कार्यक्रम को कई बार हास्य होने के कारण याद किया ।

इस तरह वह मेरी स्मृति में रहा ।लेकिन जब कुछ वर्ष गुजर गए तो मुझे इन पंक्तियों से बहुत ज्यादा नफरत होने लगी ।मैं उसका जब भी अर्थ समझती थी तो मुझे बहुत बुरा लगता था और जब अखबार पढ़ती थी या टीवी पर समाचार सुनती  तो  घोटाले भी पढ़ती व सुनती । दूसरों की बेईमानी करना,दूसरों को परेशान करना यह सब सुनकर बहुत ही दुख होने लगा ।यह सब बहुत गलत होता है । इसमें कमजोर वर्ग पर अत्याचार  होता है ।

2020में चीन से कोरोनावायरस आया  और 2021 में  अभी तक तबाही मचा रखी है।

जाने का नाम नहीं ले रहा है ।लाखों लोगों की जान जा चुकी है ।लेकिन इस बीच मैंने जो हास्य कविता बोली थी ।वह मैंने हर क्षेत्र में देखी ।चाहे बाजार में हो या कहीं भी हो। लोग लूटपाट मचाने में  में लग जाते हैं ।उन्हें एक मौका मिल जाता है कि चाहे दुनिया रो रही हो उन्हें बस पैसा चाहिए। ₹10 की चीज  15 में देंगे ।

इसी तरह कोई भी काम हो हर जगह ठगाई  करेंगे । मिलावट ने बहुत परेशान किया है ।

चिकित्सक भी  कहीं पर उनको 200रूपये लेने हैं वहां पर वह 2000 मांगते हैँ ।

कितनी जगह ब्लैक मार्केटिंग रुला रही है । आयुर्वेद के नाम पर लूट । अब सोचिए सर्फ़ में कौन सा आयुर्वेद होगा ।

व्यक्ति लालच नहीं छोड़ना चाहता ।

सबसे बड़ी समस्या मैंने देखी के लोगों ने ऑक्सीजन के मामले में कितना ज्यादा मरीजों को परेशान किया। कितने मरीज अपनी जान देकर दुनिया से विदा हो गए ।क्योंकि उनको ऑक्सीजन ही नहीं प्राप्त  हुई । जबकि ऑक्सीजन तो प्राण वायु है ।

जितने रूपये की ऑक्सीजन है । उतने मे नहीं मिलेगी ।उससे बहुत ज्यादा की मिलेगी ।या फिर उनको बहुत आवश्यक है उनको मिल ही नहीं रही है । पहुँच वालों को सप्लाई होगी । रक्त खरीद के मामले भी बहुत सुने हैं ।ब्लैक मार्केटिंग क्या हो गयी । जानलेवा हो गयी ।

अब न जाने कितने घोटाले सुनते आए हैं ।जो कि हमारे देश के लिए बहुत ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे   है।

कुछ बातें हम उम्र के हिसाब से पहले समझ में नहीं आ पाती  हैं ।लेकिन बाद में समझ में आती हैं । तब बाद में मैं बहुत ज्यादा महसूस होता है

वे  बहुत ही गहन होती हैं ।

अमानवीयता का उपचार मानवता ही होता है।

मेहनत से कमाकर लोगों को बेईमानी का शिकार क्यों होना पड़े? लेकिन यह लोगों  को समझना होगा कि वास्तव में ब्लैक मार्केटिंग हमारे देश से  चली जानी चाहिए ।अन्यथा हमारा देश किसी दिन बर्बाद हो जाएगा ।अपने आठवीं क्लास में कवि सम्मेलन में जो हास्य कविता किसी के द्वारा दी गई मैंने पढ़ी थी ।पता नहीं था आगे कविताएं लिखुँगी।

तब को अब भी  सोचती हूं । और महसूस होता है  कि हमारे देश में ब्लैकमार्केटिंग कब खत्म होगी ।

तब और अब ।

पूनम पाठक बदायूँ