छोड़ ना सका

दोराहे पर इश्क खड़ा था  मैं  कदम मोड़ ना सका

छोड़ दिया सब कुछ पर  मैं  उसे यू छोड़ ना सका

बिस्तर की सलवटे और आंखों की गवाही से पूछो

रात को भी ख्वाबों में उसका दामन छोड़ ना सका

दोराहे............ 

रो गुजारी रात यादों का  सिलसिला तोड़ ना सका

उसकी रखी मासूम सी तस्वीर से मुंह मोड़ ना सका

आया  जो  कभी  नींद का झोंका भूल चूक सी में

उसका हाथ  ले  हाथ  में फिर हाथ छोड़ ना सका

दोहारे........ 

महेश राठौर सोनू 

गाँव राजपुर गढ़ी

जिला मुजफ्फरनगर