मिले क्यों

जब बिछड़ना ही था तो मिले क्यों,

करके बेवफ़ाई फिर किए गिले क्यों।

रहना चाहते हो दूर-दूर हमसे तो फिर 

 खामखां मिलने के सिलसिले क्यों।

एक प्यार की झोंपड़ी तो बना ना सके,

बना डाले नफरत के इतने किले क्यों।

अकेले बसर करने की आदत है तुम्हें,

फिर रहने को ढुंढते हो मुहल्ले क्यों ।

था मालूम शबे-हिज्रा का नाग डस लेगा

 #प्रेम तुफानी रात में घर से निकले क्यों।

मौलिक एवं स्वरचित

प्रेम बजाज, जगाधरी ( यमुनानगर)