रास्ता ढूँढ़ लो

अरे !मुसाफिर ,

जरा़ देख चलो।

कब क्या होगा ,

रास्ता ढूँढ़ लो।

महफि़ल सजी नहीं हैं,

खुद को सजाना होगा।

मंजिल चाहे कठिन हो ,

रास्ता ढूँढ़ लो।

चींटी रानी से सीखो,

हौसला बुलंद करना।

हार मत मानो,

रास्ता ढूँढ़ लो।

सूर्य को देखो ,

समय पे ध्यान लगाना।

जागो उठो न सो जाओ,

रास्ता ढूंढ लो।

वक्त के साथ चलो,

मंजिल यूँ ही मिलती हैं।

तुम निराश क्यों हो,

रास्ता ढूँढ़ लो ।।

                    स्वरचित रचना

           लेखक डोमन निषाद डेविल

               डूंडा बेमेतरा छत्तीसगढ़