"संवाद होना चाहिए "

  आप, हम और सभी लोग संवाद की महत्ता से भली भांति परिचित हैं.... किसी भी रिश्ते के लिए संवाद का होना अति आवश्यक है... आपसी संवाद रिश्तों में विश्वास, स्नेह, प्रेम को बढ़ाता है... संवाद हीनता प्रगाढ़ संबंधों में भी दूरियाँ ला देता है.... वर्तमान समय में मनुज अपने आप में लीन होता जा रहा है.. अपनी समस्याओं, सुख, दुख, परेशानियों को किसी से ना कहकर स्वयं ही झेलता रहता है.... जिसका प्रमुख कारण संवाद हीनता है... जिससे कई बार विकराल परिस्थिति निर्मित हो जाती है...पहले संयुक्त परिवार होने के कारण आपसी संवादों से ही कई समस्याओं का अंत हो जाता था.... पर अब एक दूसरे से अपनी बात कहना निजता का हनन समझा जाने लगा है.... जबकि संवाद की महत्ता सभी महसूस करते हैं......  कई बार हम दूसरों से मन की बात कहते कहते रुक जाते हैं.. कुछ संकोच तो कुछ विश्वास की कमी के कारण.. लेकिन बाद में महसूस होता है कि काश यह बात कह दी होती.. आपस में संवाद कर लिया होता...

आपसी सम्वाद जाने कितनी ही कठिन परिस्थितियों से उबरने में सहायक हो सकता है । हमारे एक परिचित के इकलौते बेटे और बेटी में महीनों से बातचीत बंद थी कारण मां पिता को भी समझ नहीं आ रहा था घर का माहौल हर समय तनावपूर्ण  रहता.. माता पिता चाह कर भी स्थितियां सुधार नहीं पा रहे थे.. आपस में कोई बातचीत ना होने के कारण समस्या या उसका कोई समाधान नजर ही नहीं आ रहा था.. आखिरकार एक दिन पिता ने दोनो भाई बहन को बैठाया और बात करने पर जोर दिया.. बातचीत के दौरान अबोलेपन का जो कारण पता चला वह इतना गंभीर नहीं था जिसके कारण महीनों आपस में बात ना की जाए, एक गलतफहमी ने भाई बहन के रिश्ते में दरार डाल दी थी जिसका कोई अस्तित्व ही ना था.. अगर यही संवाद दोनो भाई बहन पहले ही कर लिए होते तो महीनों से घर का तनावग्रस्त वातावरण पहले ही दूर हो जाता और माता पिता का दुःख कम हो सकता था । अत: कैसी भी परिस्थिति हो, कोई भी कारण हो आपसी संवाद कभी रुकना नहीं चाहिए । कई मुश्किलों का हल आपसी संवाद से हो सकता है। संवाद ही वह जरिया है जो रिश्तों में सजीवता लाता है और आपसी संबंधों में प्राण फूंकता है अत: हर हाल में आपसी संवाद होना ही चाहिए ।

भारती यादव ' मेधा'

रायपुर, छत्तीसगढ़