बाबा तेरे जन्म दिवस पर दीप जलेंगे अबकी बार


पहलवान भी भीम राव के गीत पढेंगे अबकी बार।

बाबा तेरे जन्मदिवस पर दीप जलेंगे अबकी बार।

होरी जुम्मन  रजिया धनिया इंकलाब का परचम ले,

आँख उठाकर राजमहल की ओर बढ़ेंगे अबकी बार।

जोतने वाला ही खाएगा नारे को सच करने को,

खेत बाग पर नज़र गड़ाकर साथ लड़ेंगे अबकी बार।

कागज का हर एक परिवर्तन धरती पर ले आने को,

कदम मिलाकर परिवर्तन का

रूप गढ़ेंगे अबकी बार।

नाँक व मुँह पर बांध के पट्टी संविधान की सीमा में,

संविधान का इक इक अक्षर नाथ पढेंगे अबकी बार।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

सम्पादक

राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक

लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक

अभी उम्मीद ज़िन्दा है