तुम्हे पुकारेंगा गुलशन

जब  कांटो से   छलनी   होकर

फूल     विलख    कर    रोएगा,

और  बगिया  में  बसंत  आकर,

भ्रमित   हो   सुख   को   ढूंढेगा,

तब आशा की  किरण तुम होगे, 

तुम्हें       पुकारेगा      गुलशन।

जब रात अमावस सी काली हो, 

नखत     सभी    छुप    जाएंगे, 

चंद्र    रेखा   से    तिलक   बन,

कुल   के   माथे   पर   छाओगे,

तब   तुम्हें   पुकारेगा   गुलशन।

जब   जीवन    में    रिश्तो   के, 

धागे     बहुत     उलझे     होंगे,

और  दीप  से   तुम  आंगन  में,

सिर्फ      एक     वैभव     होगे,

तब   तुम्हें   पुकारेगा   गुलशन।

अंजनी द्विवेदी,वरिष्ठ कवयित्री व शिक्षिका 

नवीन फलमण्डी,देवरिया,उत्तर प्रदेश