दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं

कैसी छायी ये मदहोशी

अब वैसी बहती नहीं हवाएं

टूटा मेरा दिल जबसे

दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं


इक दौर चला था वफा का

साथ चलने की खाई थी कसमें

निभाएंगे आखिरी सांसों तक

हर कदम पे अपनी रस्में

          बहारों ने भी बनाया था

          इक मुकम्मल बसेरा

          पसरी रहती अब खामोशी

          गमों ने जमाया अपना डेरा

दुआओं ने कसर कुबूल किया

असर करती नहीं दवाएं

टूटा मेरा दिल जबसे

दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं

       

    दर्द मिला कुछ ऐसा

    उतरा आंखों में समंदर

    कत्ल हुआ हसरतों का

    और किश्तों में टूट रहा 

    जिगर के अंदर

    शुकूं भी भूल गया वो राहें

   उस मोड़ पर वापस कैसे आएं

   टूटा मेरा दिल जबसे

  दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं


   थी नहीं कोई तकरार की बातें

   हुआ था प्यार का मैं कायल

   क्या हुआ इक पल में जो

   करके चली गई  क्यूं

   अरमान को मेरे घायल

   आहत हुआ था दिल मेरा

   जख्मों पे मरहम कौन लगाए

   टूटा मेरा दिल जबसे

  दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं


 कैसी छायी ये मदहोशी

 अब वैसी बहती नहीं हवाएं

 टूटा मेरा दिल जबसे

 दहलीज से गुजरती नहीं फिजाएं  

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राजेंद्र कुमार सिंह

लिली आरकेड,फलैट नं-101

इंद्रानगर,वडाला पाथरडीह रोड,

मेट्रो जोन,नाशिक-09,ईमेल:

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