वर्चुअल उद्यमिता शिक्षा सम्मेलन को शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने किया संबोधित, बोले- दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में कई नवाचार अपनाए गए

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को अशोका विश्वविद्यालय की तरफ से आयोजित वर्चुअल उद्यमिता शिक्षा सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में कई नवाचार अपनाए गए है। जिसमें से उद्यमशिलता मानसिकता पाठ्यक्रम (ईएमसी) एक है। ये पाठ्यक्रम छात्रों को नए तरीके से सोचने, चुनौती स्वीकार करने और नया करने में सक्षम बनाने पर आधारित है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि दिल्ली सरकार ने अपने छात्रों में विकास की मानसिकता का निर्माण करने के लिए 9 वीं -12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए ईएमसी की शुरुआत की है। जो उनमें 21 वीं सदी के कौशल विकसित करने, अपनी प्रतिभा को समझने के साथ स्वयं में उद्यमिता की मानसिकता को बढ़ाने पर केंद्रित है। इसमें छात्र कौशल सीखते हैं और उद्यमशीलता का अभ्यास करते हैं जो उन्हें बड़े सपने देखने, नए और चुनौतीपूर्ण लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। ईएमसी में छात्रों को गहन रूप से सोचने के लिए विभिन्न अनूठी गतिविधियाँ शामिल हैं, चाहे वह फील्ड वर्क हो या प्रख्यात उद्यमियों के साथ बातचीत।

नया शैक्षणिक बोर्ड मानसिकता का भी आकलन करेगा

 उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि, “हमने दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की भी स्थापना की है जो हमारे छात्रों की मानसिकता का भी आकलन करेगा। हम अपने बच्चों का परीक्षण और आकलन साल के अंत में 3 घंटे के परीक्षा के आधार पर करते हैं। दिल्ली बोर्ड में छात्रों का लगातार मूल्यांकन होगा जिसमे उनके रटने का नहीं बल्कि उनकी मानसिकता और समझ का मूल्यांकन होगा। उन्होंने कहा कि हमें एक उद्यमशील मानसिकता रखने की आवश्यकता है चाहे हम नौकरी में शामिल हो रहे हों या रोजगार का सृजन कर रहे हों। यह बोर्ड हमारे शिक्षकों की भी मदद करेगा, जो केवल परीक्षा नहीं लेगा बल्कि पार्टनर ऑफ लर्निंग भी बनेगा। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा, “हम पिछले कई दशकों से पढ़ रहे है कि भारत एक विकासशील देश है। हमें अपने छात्रों में एक उद्यमशील मानसिकता विकसित करने की आवश्यकता है जिससे वे अपनी अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें। यदि हम अपने छात्रों में उद्यमशीलता की मानसिकता को स्थापित करने पर काम नहीं करते हैं, तो हम एक नौकरी तलाशने वाले देश बने रहेंगे, और कभी भी विकसित राष्ट्र की जगह पर नहीं पहुंचेंगे। इसमें ईएमसी एक बड़ा भागीदार है और मुझे उम्मीद है कि हमारे विश्विद्यालय छात्रों को जॉब प्रोवाइडर और सशक्त बनाने में हमारा साथ देगा।