फरहाना फातिमा ने यह बात एण्डटीवी के अपने नये शो ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ के अपने किरदार शांति के बारे में कहा, ”शांति पूरब है तो फरहाना पश्चिम“

वास्तविक दुनिया में जहाँ इस मुश्किल समय में लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, ऐसे में एण्डटीवी का नया सिचुएशनल काॅमेडी शो ‘और भई क्या चल रहा है?‘ अपने दर्शकों को हँसी और ठहाकों का सही डोज दे रहा है। इस हल्के-फुलके काॅमेडी शो ने स्थानीय कलाकारों को शामिल कर सही मायने में लखनऊ की वास्तविक तस्वीर पेश की है। लखनऊ शहर में शूटिंग की वजह से गंगा-जमुनी तहजीब का वह रूप और निखरकर सामने आया है। इसकी वजह से ही दर्शक खुद को इस शो से जोड़ पा रहे हैं। दो परिवारों, मिश्रा और मिर्जा की कहानी पेश करतेे इस शो में दिखाया गया है कि दोनों ही एक पुश्तैनी हवेली में रहते हैं। यहाँ हमारे साथ मौजूद हैं इस शो की एक मुख्य नायिका फरहाना फातिमा, जिन्होंने शंाति मिश्रा की भूमिका अदा की है। मनोरंजन जगत का काफी अनुभव रखने वाली फरहाना ने इस शो में अपनी भूमिका के बारे में बात की। साथ ही इस छोटी-सी मुलाकात में कुछ मजेदार सवालों के जवाब भी दिये।

1. इस शो में अपनी भूमिका के बारे में और यह आपको कैसे मिली, बतायें?

मैं शांति मिश्रा की भूमिका निभा रही हूँं, जो नाम से शांति है लेकिन रहती हमेशा अशंात  ही है। शांति झगड़ालू और हुक्म चलाने वाली है, लेकिन परिवार के प्रति उसके मन में लगाव है। उसे पता है कि अपनी होशियारी और चालाकी से दूसरों से अपना काम कैसे निकलवाना है, खासकर अपने पति राम प्रसाद मिश्रा (अंबरीश बाॅबाी) से। पूरे घर का जैसे रिमोर्ट कंट्रोल है उसके हाथ में, मजाल है किसी की कोई शांति को मना कर दे। उसका रवैया ऐसा होता है कि इस घर पर सिर्फ उसका हुक्म चलता है। यही बात उसे अड़ियल हाउसवाइफ बनाती है। पहले मैंने सकीना के किरदार के लिये आॅडिशन दिया था और मैंने सोचा कि मुस्लिम होने के कारण मेरे लिये इस किरदार में ढलना आसान होगा। मुझे ऐसा लगा कि सकीना की भाषा और तौर-तरीके मुझसे काफी मिलत-जुलते हैं। लेकिन मेकर्स को लगा कि मैं शांति के लिये ज्यादा बेहतर हूँ। एक ऐक्टर होने के नाते, मुझे चुनौतीपूर्ण भूमिकाएँ निभाना पसंद है, जो मेरे कम्फर्ट जोन से बाहर हो। इस किरदार के लिये मैंने कई सारे आॅनलाइन आॅडिशन दिये इसके बाद ऑनलाइन ऑडिशन दिया और कुछ माॅक शूटिंग भी की। और आखिरकार लीजिये आपकी शांति मिश्रा यहाँ आपके सामने है।

2. क्या आप अपने ऑन स्क्रीन किरदार को अपने करीब पाती हैं?

सच कहूँ तो वो पूरब है तो मैं पश्चिम हूँ। शांति और मैं बहुत अलग हैं, लेकिन इसके बावजूद मैं किरदार में काफी आसानी से ढल गयी। कैमरे के पीछे फरहाना बहुत ही मृदुभाषी और सौम्य है। मैं उन लोगों में से हूँ जो झगड़ों से बचती हैं। वहीं शांति बहुत झगडालू है, हुक्म चलाती है, लोगों पर हावी होने की कोशिश करती है लेकिन पाॅजिटिव है। उसकी यही बात उसे जीवंत बनाती है। शांति में जिस तरह की पाॅजिटिविटी है वह देखकर अच्छा लगता है। और उसकी यह बात कि अपने परिवार को बचाने के लिये वह किसी भी हद तक जा सकती है, मुझे वह और भी अच्छी लगने लगी।

3. क्या यह आपकी पहली लीड भूमिका है और आपको कैसा महसूस हो रहा है?

‘और भाई क्या चल रहा है?‘ से पहले मैंने कई सारी रीजनल फिल्मों में काम किया है। और जहाँ तक टेलीविजन की बात है तो हाँ, मैंने कई सारी नेगेटिव भूमिकाएँ की हैं, इस लिहाज से टेलीविजन की दुनिया में यह मेरी पहली लीड भूमिका है। मेरे किरदार की सबसे अच्छी बात यह है कि मुझे हर दिन उस कहानी को जीना पड़ता है और अपनी तरफ से पूरी कोशिश करनी पड़ती है। मैं अभी रोज दो जिंदगियाँ जी रही हूँ, एक फरहाना की और दूसरी शांति की। यह बहुत अच्छा अनुभव है और मैं अपनी किस्मत का जितना शुक्रिया अदा करूँ कम है कि वह मुझे यहाँ लेकर आयी।

4. इस शो के बारे में बतायें और यह भी कि इसकी क्या खासियत है?

यह शो लखनऊ की असली खूबसूरती दर्शाता है। इस शो के हरेक कलाकार और क्रू के सदस्यों ने इस शो को बनाने में इतने मन से काम किया है कि इसकी हर चीज वास्तविक लगती है। इसका सेट, लोकेशन और सारी चीजें वास्तविक हैं। इस शो की शूटिंग असली हवेली में हुई है, जिसे दो हिस्सों में बाँटा गया है। इस शो के स्वाभाविक और वास्तविक माहौल के साथ दर्शकों के सामने नये तरह का कंटेंट पेश किया गया है। घर पर बैठे-बैठे लखनऊ का स्वाद चखा दे, ऐसा है हमारा शो।

5. एक विधा के तौर पर काॅमेडी का आपका अनुभव कैसा रहा है?

मुझे ऐसा लगता है कि किसी को हँसाने से ज्यादा अद्भुत अनुभव कुछ नहीं हो सकता। एक विधा के तौर पर काॅमेडी में वैसा जादू है। हम सभी दिन भर तनाव में रहते हैं और इस वैश्विक महामारी के बीच, हमें कई सारी मुश्किलों का सामना करना है। ऐसे में काॅमेडी शोज़ लोगों के लिये ताजा हवा के झोंके जैसे आते हैं। मुझे हमेशा से काॅमेडी पसंद आती रही है। मैंने अपनी एक फिल्म में एक छोटा-सा काॅमिकल रोल निभाया था। और जैसे कहते हैं न कि शेर के मुँह में खून लग गया हो, वैसे ही मुझे काॅमेडी करने का चस्का चढ़ गया था। मैं सचमुच काॅमेडी में अपना हाथ आजमाना चाहती थी और मुझे इस बात की खुशी है कि ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ का मौका मुझे मिला। लोगों को हँसाना और उन्हें अपनी चिंताओं तथा तनाव को भूलने में मदद करना हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। अपने काम के साथ खुशियाँ फैला सकूँ, इससे बेहतर चीज मैं और क्या ही माँग सकती हूं।

6. जैसा कि नाम से पता चलता है, ‘और भाई क्या चल रहा है‘, हर भारतीय के बातचीत शुरू करने का एक आम तरीका है। तो आपको किस तरह बातचीत शुरू करना पसंद है और क्यों?

मेरी तो जैसे आदत ही हो गयी है ये पूछने कि ‘कैसे हो?‘, क्या चल रहा है?‘। मैं जहाँ भी जाती हूँ, या जब भी किसी से मिलती हूँ , सबसे पहली चीज यही पूछती हूँ कि ‘आप कैसे हैं?‘ यह तरीका अलग-अलग हो सकता है, जैसे यदि मैं अपने दोस्त से मिल रही हूँ तो मैं कहूंगी कि ‘और भाई साहब कैसा चल रहा है?‘ और यदि मैं किसी और से मिल रही हूँ तो मैं कहूंगी, ‘कैसे हैं आप?‘

7. ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ बातचीत शुरू करने का तरीका है। ऐसे ही इससे जुड़ा कोई मजेदार वाकया रहा है जो आप हमें बताना चाहें?

ऐसा तो कोई वाकया याद नहीं आ रहा, लेकिन ‘और भाई क्या चल रहा है? हर किसी का तकियाकलाम जैसा है। मेरे कहने का मतलब है कि घर से निकलते ही कोई ना कोई पूछ ही लेता है कि और भाई क्या चल रहा है? लेकिन मेरी एक दोस्त है जिसे किसकी लाइफ में क्या चल रहा है उसके बारे में जानकारी रखना अच्छा लगता है। इसलिये जब मैं शूटिंग में व्यस्त होती हूँ तो दोस्तों के जीवन में क्या चल रहा है उसके बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाता, लेकिन अपडेट रहने के लिये अपनी दोस्त से 30 मिनट बात कर लो तो सब कुछ पता चल जाता है। मुझे लगता है कि उसे यह शो पसंद आ रहा होगा, क्योंकि वह इससे सबसे ज्यादा खुद को जोड़ पा रही होगी। (खिलखिलाते हुए)

8. शांति और सकीना के बीच खट्टा-मीठा रिश्ता है, तो क्या वे कभी दुश्मन तो कभी सहेली हैं?

‘कभी दुश्मन कभी सहेली‘ वाली बात शांति और सकीना के रिश्ते को सही मायने में बताती है। उनके बीच हमेशा एक तरह का मुकाबला लगा ही रहता है। लेकिन उनके बीच एक प्यारी-सी दोस्ती भी है। एक-दूसरे से बात किये बिना उनका दिन नहीं गुजरता। गाॅसिप और टीवी सोप की कहानियाँ सुनाने से लेकर दिल की बात कहने तक, दोनों एक-दूसरे की बातें बड़े ही ध्यान से सुनती हैं। उनकी केमिस्ट्री इस शो को और भी दिलचस्प बनाती है।

9. सांस्कृतिक रूप से अलग संस्कृति से ताल्लुक रखने वाली अभिनेत्रियाँ एक-दूसरे से अलग किरदार निभा रही हैं। इसका कोई खास कारण है?

मेकर्स इस शो के कर्ता-धर्ता हैं। उन्होंने हमें अपने-अपने किरदार दिए हैं और मैं उनके फैसले से खुश हूँ। एक मुस्लिम होने के नाते सकीना का किरदार निभाना मेरे लिये बहुत आसान था, लेकिन शांति का किरदार मुझसे बिलकुल उलट है। इससे एक व्यक्ति के तौर पर मुझे चुनौती मिली है। एक ऐक्टर के रूप में मेरे ख्याल से अलग-अलग कैरेक्टर्स को जीना ही, जीना होता है।

10. ‘एबीकेसीआरएच‘ दो पड़ोसियों की कहानी है जो एक पुरानी हवेली में साथ-साथ रहते हैं। क्या वास्तविक जीवन में आपने इस तरह की परिस्थिति का सामना किया है। यदि हाँ तो आपने उसे कैसे सुलझाया? यदि नहीं तो पाठकों को कोई टिप्स और ट्रिक बताना चाहेंगी, यदि वो इस तरह की स्थिति में फंसते हैं?

मैं कभी भी एक ही छत के नीचे दूसरे परिवार के साथ नहीं रही हूँ। लेकिन हाँ, हमारे हिन्दू पड़ोसी हैं। मैंने अपनी पूरी जिंदगी गंगा-जमुनी तहजीब का अनुभव किया है। मेरे लिये कुछ नया नहीं है, बचपन से ही ऐसे ही कल्चर में पली-बढ़ी हूँ जहाँ हिन्दू-मुस्लिम साथ-साथ रहते हैं, एक परिवार की तरह। यह शो मेरे उन्हीं अनुभवों का अक्स है। यदि मैं कभी इस तरह की स्थिति में फँसती हूँ तो मुझे लगता है कि पाॅजिटिव बने रहना ही उसका एकमात्र उपाय है। एक-दूसरे को समझना और स्वीकार करना ही इस पूरे अनुभव को आसान बनाता है। साथ ही यह शो आपको एक नया नजरिया देता है, उसके लिये आपको इस शो को देखने की जरूरत है। (आँखें झपकाती हैं)

11.इस शो में काफी सारे स्थानीय कलाकारों को मौका दिया गया है, आपकी इस बारे में क्या राय है? और इस इंडस्ट्री में आपका अभी तक का सफर कैसा रहा है?

ग्लैमर की चमक-दमक में हम अक्सर लोकल टैलेंट को इग्नोर कर देते हैं। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि इस शो में स्थानीय लोगों को यह प्लेटफाॅर्म दिया गया, जो सही मायने में इसके काबिल थे। लोकल टैलेंट ने इस शो में और भी जान डाल दी है। मैं इस इंडस्ट्री में पिछले 12 वर्षों से काम कर रही हूँ। मैंने लखनऊ से अपनी पढ़ाई पूरी की है, उसके बाद मैं नौकरी करने दिल्ली चली गयी, जहाँ मुझे अहसास हुआ कि मुझे अपने एक्टर बनने का सपना पूराा करना चाहिये। वह सपना मुझे मुंबई ले आया, जहाँ मैंने थियेटर किया और मुझे फिल्मों तथा सीरियल में काम करने का मौका मिला। वैसे वह सफर काफी मुश्किल-भरा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि सफर मुश्किल होता है लेकिन मंजिल खूबसूरत होती है।

12. जब आपने ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ शो में काम लिया तो आपके दोस्तों और परिवार के लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी?

सिर्फ ‘और भाई क्या चल रहा है?‘ की बात नहीं है, बल्कि मैंने जितनी भी चीजें की हैं, सभी में मेरे परिवार ने हमेशा ही मेरा साथ दिया है। खासकर मेरे पापा हमेशा ही मेरे साथ होते हैं, मेरे अच्छे समय में और मेरे बुरे समय में। मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे इतना साथ देने वाला परिवार मिला है। उन्हें यह शो देखकर वाकई बहुत मजा आ रहा है। और उनके बीच जितना प्यार और उत्सुकता है वह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है। इससे मुझे ज्यादा से ज्यादा मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।