॥ मेरे रहबर ॥

जब चली जाओगी तुम

मुझसे युँ रूठकर

जी ना पाओगी तुम भी

मेरे बिन मेरे अजीज रहबर

अश्क बहाती रहेगी

तेरी ये आँखें तेरी नजर

लौट कर आओगी झ्क दिन

मेरे पास मेरे अजीज दिलबर

भूल पाओगी ना कभी मुझे

तुँ ये मेरा पावन सा शहर

याद आयेगी तुम्हें पल पल

मेरी नगर का ये डगर

कैसे बितेगी सूनी रात  तेरी

मेरी बॉहों के बगैर

सो ना पाओगी अकेली

मेरे ही तरफ होगी तेरी बोझिल नजर

हर आहट पे चौंक जाओगी 

मेरे मासुम हम सफर

रो रो कर गुजर जायेगी

रात की सारी पहर

भीग जायेगी अश्क से तकिया

टुट जाओगी तुँ इस कदर

ढुँढ ना पाओगी भीड़ में

मुझे मेरे रहगर

जिद ना कर जुदा होने की

तुँ अब रह रह कर

कैसे जियोगी मेरे बिन

बता दो मुझे मेरे दिलबर

समझाऊँ मैं कैसे 

तुम्हें मेरे हमसफर

ना तोड़ो मोहब्बत को 

ये नाजुक है मेरा ये जिगर।

उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088