मिट्टी के बर्तन में पका खाना दूर करेगा खून की कमी, मिलेंगे और भी कई लाजवाब फायदे

एक जमाना था जब खाना बनाने के लिए सिर्फ मिट्टी के बर्तनों का ही इस्तेमाल किया जाता था लेकिन फिर टैकनोलॉजी और बिजी लाइफस्टाइल के चलते रसोई घरों में प्लास्टिक, स्टील, एल्युमिनियम, कांच के बर्तन, नॉन स्टिक तवे आदि ने अपनी जगह बना ली। इन धातुओं में खाना तो जल्दी बन जाता है लेकिन सेहत के लिहाज से देखा जाए तो इसे ज्यादा सेहतमंद नहीं माना जाता। इन धातुओं में भोजन पकने से पोषक तत्व कम हो जाते हैं। सेहत संबंधी बढ़ती समस्याओं को देखते हुए लोग अब स्वास्थ के प्रति सजगता दिखा रहे है। रसोई में फिर से मिट्टी के बर्तन अपनी जगह बना रहे हैं। मिट्टी के बर्तन भी दो तरह के होते हैं एक कुम्हार द्वारा परंपरागत चाक पर बनाए गए और दूसरे फैक्ट्री में डाई में बनाए गए। दोनों तरह के बर्तन मजबूत और सेहत के लिए अच्छे होते हैं।

शरीर को मिलते हैं 18 तरह के पोषक तत्व

मिट्टी के बर्तन में बनी दाल-सब्जी और रोटी में पोषक तत्व खत्म नहीं होते। प्रैशर कुकर की बजाए मिट्टी की हांडी में भोजन पकाने से शरीर को 18 प्रकार के सूक्षम पोषक तत्व मिलते हैं, जिनमें कैल्शियम, कोबाल्ट, मैग्घ्नीशियम, आयरन, सल्घ्फर, सिलिकॉन, जिप्सम आदि शामिल हैं जबकि प्रेशर ककुर में ये सभी तत्व नष्ट हो जाते हैं।

नहीं खत्म होते माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स

मिट्टी के बर्तन में बनी दाल और सब्जी में 100% और प्रेशर कुकर की चीजों में 87% माइक्रो न्यूट्रीएंट्स अवशोषित होते हैं। वहीं, एल्यूमीनियम के तवे पर रोटी बनाने से उसके 87% पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। एल्युमीनियम 87%, पीतल 7% और कांसा 3% तक भोजन में मौजूद पोषक तत्व को खत्म कर देता है जबकि मिट्टी के बर्तन में 100% तत्व मौजूद रहते हैं। वहीं, इसमें पका भोजन भी दूसरे बर्तनों के मुकाबल ज्यादा स्वादिष्ट होता है।

कब्ज और पेट की समस्याओं से राहत

मिट्टी के बर्तनों में खाने-पीने से ना सिर्फ कब्ज, एसिडिटी की समस्याएं रहती है बल्कि यह पाचन क्रिया को भी सही रखता है। साथ ही इसमें मौजूद एल्कलाइन गुण शरीर में चभ् स्तर को भी संतुलित रखता है।

कैंसर से बचाव

यह शरीर में एसिटिक कोशिकाओं को बढ़ने से रोकता है जिससे कैंसर होने का खतरा बहुत कम हो जाता है। वहीं इससे शरीर में खून की कमी भी नहीं होती।

खाना जल्दी नहीं होता खराब

मिट्टी के बर्तनों में आप खाना भी ज्यादा देर तक स्टोर करके रख सकते हैं क्योंकि इसमें भोजन लंबे समय तक फ्रेश रहता है। वहीं, इसमें पका भोजन भी दूसरे बर्तनों के मुकाबल ज्यादा स्वादिष्ट भी होता है क्योंकि मिट्टी के बर्तन में खाना धीरे-धीरे बनता है जो मिट्टी में पाए जाने वाले गुणवत्ता के साथ स्वाद को भी बरकरार रखते हैं।

मिट्टी का घड़ा या वाटरकूलर

मिट्टी के घड़े का पानी तो बहुत से लोग पीते हैं। मिट्टी के पोषक तत्व पानी के साथ मिलकर इसे और हैल्दी बनाते हैं। यह पानी को शुद्ध करने का काम भी करता है। मिट्टी के घड़े की जगह मिट्टी के वाटरकूलर ने भी ले ली हैं। जिसके साथ

कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें

1. मिट्टी के बर्तन को यूज करने से पहले करीब 12 घंटे पहले इन्हें पानी में भिगो कर रख दें और फिर अच्छी तरह सुखाने के बाद ही इसका इस्तेमाल करें। छोटे बर्तन जैसे कटोरी, गिलास, हांडी, कप, चम्मच आदि को कम से कम 6 घंटे तक पानी में भिगोएं।

2. जब भी मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाए तो मध्यम आंच पर पकाएं। इससे भोजन ज्यादा पौष्टिक और स्वादिष्ट बनेंगा।

3. मिट्टी के बर्तनों को आप स्टील की क्रॉकरी की तरह यूज नहीं कर सकती। डिशवॉशिंग सोप और डिटर्जेंट से इनकी सफाई ना करें क्योंकि ये मिट्टी के पोर्स में जमा हो जाएगा। इन्हें साफ करने के लिए गर्म पानी में नींबू का रस, बेकिंग सोडा और नमक डालकर उबालें। फिर इन बर्तनों को पानी भिगोकर नारियल के छिलकों से सफाई करें।

यकीन मानिए, मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल ना सिर्फ आपके पैसे बचाएगा बल्कि इससे आप लंबे समय तक कई बीमारियों से भी बचे रहेंगे।

posted by -दीपिका पाठक