एक नजर इधर भी

जीजा को शाली का मशविरा

दुल्लहपुर। गाजीपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सरगर्मी से जिलापंचायत का चुनाव लड़ रहे जीजा को जब  शाली ने अपनी ससुराल के चौखट पर  रात्रि 8:45बजे लकदक नेता गिरि के लिवास में  देखी तो  फूले नहीं समाई और आनन फानन में  जीजाजी को संजीवनी देने के लिए पानी चाय का मुकम्मल बन्दोबस्त  कर डाली। शुक्रिया भरी नजरों से जीजा ने शाली को और शाली ने जीजा को देखा। जाते जाते  मशवीरा के बहाने शाली ने अपने मन की बात जीजा से यूं रखते हुए कहा " चुनाव के नशा में जीजाजी राऊर मुंह सुखा गईल , देंह दुबरा गईल।अईसन जनि करीं।कवनो टानिक के सुई लगवा लेईं। तन्द्रुस्ती लाख नियामत होले। सम्हाल के राखीं। जीजाजी दिलबहार शाली के अक्लमंद इसारो का समर्थन करते हुए आगे बढ़ गए। 

आराम हराम हो गइल

गांव की सरकार में मुखिया के किरदार का कोई जबाब‌ नही। गांव में छोटा से लेकर बड़ा काम,चाहे वह वाद से विवाद तक हो अथवा शेष‌ से विशेष तक।सबमें मुखिया की भूमिका अग्रणी होती है।ऐसा इसलिए की मुखिया पद बेहद सम्मानित और असरदार माना जाता है। इसलिए कि मुखिया गांव का प्रथम नागरिक होता है।यही वजह है कि चुनावी मौसम देखकर अदृश्य चेहरो‌ का मन मयूर भी नाचने लगता है फ़र्क भी होता है तो मामूली सा।यही की मयूर सा नर्तन के साथ मेंढकों सी कंठताल का बेमेल मिलन। इन‌दिनो पंचायती चुनाव के अखाड़े में शायद ही कोई ग्राम पंचायत होगी  जहां  दर्जन भर से प्रत्याशी से नीचे होगे। वरन् संख्या का ग्राफ ऊपर बता रहा है।यही वजह है कि पचास  पार के ओटर चुनाव चिन्ह  से संबंधित कागजात पकड़ते घबरा से गए हैं।एक साथ चार प्रत्याशियों (जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत के  प्रधान तथा उनके मेम्बरों )को  ओट दिया जाना है। हर रोज सम्पर्क के दौरान चुनाव चिन्ह का पोथा दिया जा रहा है।एक 70वर्षीय बुजुर्ग ने जबरन चुनाव चिन्ह के ढेरों कागज पकड़ते हुए कहा कि "भइया तोहन लोगन  त एतना कागज दे देत हवा  कि देखिके दिमाग सनक जात बा । आराम हराम किले बाटा । यह सच है कि शहर गांव गली की दीवारों पर सिर्फ और सिर्फ प्रचार के पोस्टर ही दिखाई दे रहे हैं। सुबह दोपहर शाम  चुनावी धमा चौकड़ी से लोगों का आराम हराम हो गया है।

गौरीशंकर पाण्डेय सरस