तो देर किस बात की

गुजरा वक्त कैसे,हुआ न जिक्र हालात की

चाहते हो बयांँ करना,तो देर किस बात की


अगर समझा होता मैं, तेरी भावनाओं को

नहीं गुजरा होता यूंँ लम्हा,चांँदनी रात की


कोशिश किया  था ,भरसक मिलूंँ तुमसे

नहीं मुनासिब  था मिलना,मुलाकात की


क्या समझाऊं  मैं तुझे,थक गया हूंँ अब

मजा  लिया आपने, कैसे  हवालात  की


कद्र करना तेरी फितरत में ,है भी कहां

कर दिया लहूलुहान ,तुमने जज्बात की


जीता  तुमने  बातों  से , मुकम्मल जहांँ

कद्र  होती  हमेशा , अच्छे ख्यालात की


सम्पर्क सूत्र......

राजेंद्र कुमार सिंह

लिली आरकेड,फलैट नं-101

इंद्रानगर,वडाला पाथरडीह रोड

मेट्रो जोन,नाशिक-09,ईमेल: rajendrakumarsingh4@gmail.com