॥ पूनम की चाँदनी ॥

पूनम की चाँदनी नभ पे चली आई

बदरी में दुल्हन की तरह शरमाई

जब तुँने पायलिया छलकाया

प्यार की रंग फिजां में घुल आया


पपीहा डाली पे पिहू पिहू बोले

अमुवा की मंजरी डाली पे रस घोले

चारों ओर मोहब्बत की रूत छाई

बह रही है मदमस्त पुरवाई


बाग बगीचे में मस्ती है अंकुराई

फिजां में भंग की नशा घुल घुल आई

बादलों के संग चंदा खेल रही अठखेलियाँ

चमन में भौंरा संग रंग विरंगी कलियाँ


रात रानी शाम हवा को महकाये

रूत मोहब्बत की गली गली घूम आये

आओ चन्द्रलोक की सैर करा दूँ

प्यार की एक चुम्बन माथे पे सजा दूँ


इल्तजा मेरी इन्कार ना करना

रूठ कर वापस घर ना मुड़ जाना

अपनी प्रेम की होगी अब रवानी

प्यार अंकुरेगा उपजेगा प्रेम कहानी



चन्दा की बिन्दी माथे पे सजा दूँ

झील के किनारे चलो दूर तक घूमा दूँ

मेरे हाथ में अपनी हाथ दे जाओ

काँधे पे मेरी सोने में ना शरमाओ


ओ चन्दा मेरी मेहबूबा को समझाना

बाहों में एक दूजे को अपने में छुपाना

प्रेम डगर की एक नगर हमें भी दिखाना

चन्द्रलोक में अपनी हम दोनों को बसाना ।


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088