कोविड-19 अस्पताल, क्वॉरेंटाइन सेंटर से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में अति सावधानी जरूरी - लापरवाही जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकती है

गोंदिया - वैश्विक रूप से कोरोना महामारी ने 2021 में दोबारा घातक तरीके से संक्रमण के द्वारा अति जनहानि पहुंचाई जा रही है जो काफी चिंता का विषय है। जिस के निराकरण के लिए वैश्विक स्तरपर उपाय, सावधानियां व टीकाकरण अभियान जोरदार ढंग से चलाया जा रहा है।... बात अगर हम भारत की करें तो यहां भी शासन-प्रशासन की पूरीताकत झोंक दी गई है, जिसे हम इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा देख व सुन रहे हैं। मेरा एक सुझाव है कि कोविड-19 अस्पताल,क्वॉरेंटाइन सेंटर से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए अतिसावधानी बरतना जरूरी है। क्योंकि जिस तरह मेडिकल विशेषज्ञ और अन्य संबंधित डॉक्टर इस बार की कोरोना महामारी द्वितीय के बारे में बता रहे हैं कि उनके उनको लगता है इस बार की महामारी पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक घातक और कई सिम्टम्स के साथ इसके लक्षण दिखाई दे रहे हैं काफी चिंताजनक स्थिति है।अतः प्रत्येक राज्य में जिला प्रशासन स्तर पर कोरोना मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट पर पैनी नजर से निगरानी रखना बहुत जरूरी है क्योकि यह वेस्ट कहीं इधर-उधर फेंक दिया जाए तो उसमें उपलब्ध जर्म्स कुछ ही सेकंडों में कोरोना का संक्रमण तीव्रता से फैला देगा। इस बार हम देख रहे हैं कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी बड़ी तीव्रता से संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि इस बार ऐसा कोई समाचार या मीडिया के माध्यम से जानकारी नहीं आई है कि मेडिकल वेस्ट निस्तारण में कोई कोताही बरती जा रही है जो कि तारीफ के काबिल है, फिर भी इस स्तर पर जिला प्रशासन को पैनी नजर रखनी होगी,क्योंकि जिस प्रकार से ऐसे मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट का प्रोटोकॉल है उसी प्रकार से उसका प्रबंधन हो ताकि नागरिकों में इस मेडिकल वेस्ट के कारण संक्रमण न फैले। मेडिकल इक्विपमेंट में जैसे पीपीई किट्स, डिस्पोजल बेडशीट, ब्लड बैग, यूरिन बैग,फेसशील्ड मास्क, यह सब चीजें हैं जो किसी न किसी प्लास्टिक से बनती हैं और कोरोना से बचने डॉक्टर्स सहित सभी मेडिकल कोरोना वॉरियर्स के लिए मददगार साबित हो रही है क्योंकि मेडिकल कोरोना वारियर्स के लिए यह सब सुरक्षात्मक वस्तुएं सेवा में जरूरी है, जिसके लिए इसका उपयोग किया जाता है। अतः इन सब चीजों का सही तरीके से वह प्रोटोकॉल से निस्तारण पर विशेष ध्यान व सावधानी बरतनी अत्यंत जरूरी है, क्योंकि हम सब ने सुना होगा,नजर हटी दुर्घटना घटी। थोड़ी सी भी लापरवाही हजारों व्यक्तियों का को संक्रमित कर सकती है। अतः संबंधित अधिकारियों को इसके वेस्ट के निस्तारण पर पैनी नजर रखनी होगी।... बात अगर हम मरीजों द्वारा प्रयोग में लाए गए या उन्हें  उपचर्रार्थ दी गई वस्तुओं, सुविधाओं पर की करें, तो उनके यूजलेस होने पर विशेष ध्यान से निस्तारण करना होगा, क्योंकि उनके संक्रमण और किसी में फैल सकते हैं। हालांकि पिछले वर्ष 2020 में इस तरह मेडिकल वेस्ट के मिस मैनेजमेंट की शिकायतें और अनेकों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के चैनलों ने बहुत शहरों की ग्राउंड रिपोर्टिंग कर दिखाया गया था कि किस तरह पीपीई किट्स, हंड ग्लब्स, फेस शील्ड अस्पताल के बाहर कचरे के ढेरों में पड़ी मिली थी और मामला जोर शोर से उठा था। परंतु इस बार इस तरह की कोई भी असावधानी, लापरवाही मीडिया के माध्यम से सुनने को नहीं मिली है जो के तारीफे काबिल बात है, और कोरोना वरियर्स द्वारा इस संबंध में किए गए अच्छे प्रबंधन भी काबिले तारीफ है। परंतु फिर भी इस पर पैनी नजर रखनी होगी ताकि किसी भी प्रकार के कुप्रबंधन और लापरवाही से जनता के स्वास्थ्य पर विपरीत असर ना पड़े क्योंकि जनता के स्वास्थ्य की रक्षा करना स्वास्थ्य कोरोनावरियर्स का प्रथम कर्तव्य भी है।...बात अगर हम पीपीई किट्स, हैंड ग्लब्स, फेस शिल्ड, मासिक इत्यादि की करें तो यह कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में इसके निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग होता है और इसमें भी अनेक सिंगल यूज प्लास्टिक के इक्विपमेंट्स शामिल हैं। हमें याद होगा कि साल 15 अगस्त 2019 को माननीय प्रधानमंत्री महोदय ने लाल किले से सिंगल यूज प्लास्टिक का कम से कम इस्तेमाल करने की अपील की थी। साथ ही कहा था कि सिंगल यूज प्लास्टिक 2022 तक देश को सिंगल यूज प्लास्टिक से फ्री कर दिया जाएगा।लेकिन शायद किसी को भी इस बात का आभास नहीं होगा कि 6 माह के भीतर ही एक ऐसी महामारी आएगी जिससे बचने के लिए प्लास्टिक का ही इस्तेमाल करना होगा और यह कोरोना महामारी आज भी बुरी तरह से जनहानि पहुंचा रही है, और हम कोरोना महामारी से लड़ाई में इसका उपयोग कर रहेहैं जो अत्यंत जरूरी भी हैजो स्वास्थ्य कोरोना वरियर्स के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। परंतु  बस जरूरत है इन्हें अति सावधानी से उपयोग के बाद नष्ट करने का,जो स्वास्थ्य विभाग अभी सफलता पूर्वक सावधानी से, बिना लापरवाही के कर भी रहा है परंतु इसमें विशेष ध्यान व पैनी नजर रखने की जरूरत स्थानीय प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की है ताकि किसी भी स्थिति में लापरवाही व कोताही ना हो और इसका डिस्पोज प्रोटोकॉल अनुसार करने की जवाबदारी से हर स्वास्थ्य कर्मचारी को साथ में सहयोग देना होगा ताकि जरासी भी चूक के कारण आम जनता में संक्रमण नफैले और सभी स्वास्थ्य कोरोनावरियर्स आपस में इस कोविड-19 अस्पताल और क्वॉरेंटाइन सेंटरों से निकलने वाले मेडिकल वेस्टके निस्तारण अपनी पीपीई किट्स, हैंड ग्लब्स इत्यादि को वेस्ट करने में एक दूसरे को प्रोत्साहन दें और सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करें जिसमें आम जनता और कम से कम इस क्षेत्र से होने वाले संक्रमण से तो बचाया जा सकता है।

संकलनकर्ता-लेखक कर विशेषज्ञ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र