बस यूँ ही 13

हौंसले  कब किसी हकीम से कम होते हैँ

हौंसले  कब किसी शरीफ से कम होते हैँ 

कभी भी रोने का मन करे चुप कहते हैँ 

रास्ते जिद्दी होते हौंसले  सुन कहते हैँ ।।

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सात सौ छियासी  मुझको  भाता है

सात आठ छ : जुड़ें इक्कीस आता है

रा  गुरु और  म  से लघु  बन जाता है

श्री राम का नाम भी जप जाता है।।

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पथ हो  पथरीला ठोकरे बहुत हैं

स्वभाव से यह चाहे जिद्दी बहुत है

पानी से हार जाते हैं ये पत्थर

नीर तो बहता तेज है पत्थरों पर ।।

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कुछ वक्त के लिए बनती है रंग बिरंगी रंगोली

फिर भी हम आशा और उम्मीद से सजाते हैँ

मन को शांति, आशा  और ख़ुशी देती रंगोली

जीवन  आशा देती  रंगोली  रंग बताते हैँ ।।

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होली सिर्फ रंग और ग़ुलाल से ही नहीं होती

हर्ष उल्लास, भाईचारे प्रेम से ही महकती 

होली ईश्वर भक्ति रिश्ते  का सन्देश भरी होती

होली इस तरह महके  जैसे चिड़िया चहकती ।।

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कुछ लोग दूर जाने के बाद भी नहीं जाते 

रहते  हैँ हमेशा अपने साथ बस यादों में 

दुआओं में भी करते रहते वे अक्सर  बातें 

बहुत असर होता है ह्रदय की इन दुआओं में ।।

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जल से पृथ्वी जल से आकाश सभी दिशाएं  

जल से आग  जल से  पेड़ फसल अमी बताएं 

जल बिना ना  कोई पेय जल जीवन बचाएँ 

खूब पिएं जीवन जल लेकिन जल आप बचाएं ।।

कविता से बेरुखी न करना कभी संसार

कविता रुख रे अपना बदल लेगी संसार

कविता भोली तीव्र औषधि कटु प्रेम भाव  

कविता न तेरे दर्शन  कैसे होंगे संसार ।।

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मैं अपने सफर में हूं सफल ऐसा हो

शांति की बयार हर तरफ हो ऐसा हो

माँ प्रकृति जो देती मानव को जिंदगी

करते रहें हम उस प्रकृति माँ की बंदगी ।।

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ज़माने में अच्छी कम बुरी नज़र ज्यादा रही

तभी प्रेम आकांक्षी गौरैया अब कम हो रही

प्रकृति दायिनी है होती अपनी प्यारी गौरैया

बचा लो गौरैया  जरुरत यह हमारी गौरैया ।।

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गर रिश्तों में सिर झुकाना आ गया

सच कि उसे रिश्ता निभाना आ गया

पर सच सच जब भी मुँह पर आ गया

कंठ स्वर से रिश्ते में चटक आ गया ।।

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राधा कृष्ण  किसी प्रेम कथा के किरदार नहीं

इनका प्रेम वह है जग को जिसका ज्ञान नहीं

राधा कृष्ण के प्रेम का अर्थ आत्म सुधार है

राधा कृष्ण प्रेम को जाना भावसागर पार है ।।

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सृष्टि कहती नारी श्रद्धा थी है और श्रद्धा रहेगी

आजाद होकर भी समर्पित नारी परतंत्र रहेगी

औरों के लिए खुद को मढ़ती  जिम्मेदारियों में

देखा प्रेम त्याग भी भरा है कितना नारियों में ।।

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रंगों को ही अपना रंग कहाँ पता होता है 

इंसानों को अपना रंग कब खबर होता है 

शायद यूँ आईना देखना जरुरी होता है

नजर के साथ सही नज़रिया जरुरी होता है ।।

कितनी मजबूरियों की ईंट लगतीं

कितना अवरोधों का लगता गारा

कितना पसीना बहाना ही पड़ता

क्यों जीवन होता है कितना प्यारा।।

फासले भी रखे नेकियां भी करते रहे

तेरे जाने का हम इंतजार करते रहे

मेरे वतन  जरा सा सम्भल कर अगर रहते

कोरोना इक्कीस में  बीस  रोते न रहते ।।

कोरोना सिखा रहा न पत्र कलम दवात

दुश्मन मर जाए या हो भी जाए खाक

छाया शत्रु की मिल सकती है कहीं भी

हो कितनी शक्ति हो सावधानी बड़ी सी ।।

पूनम पाठक बदायूँ साहित्य

नकाब जो चेहरा छिपाता भला करता  उत्तम है

नकाब चेहरे में छिप बुराई  छिपाता दुश्मन है

आग  ही लग जाये  नकाब में जो  लाता संकट है 

ख़ुशी से जियो और जीने दो लघु  मनुष्य  जीवन है ।।

सड़कों को वीरान करने का न तुम इरादा करो

प्रकृति से खिलवाड़ करने का ना  तुम इरादा करो

युग  ही समाप्त हो चुके हैँ जाने कई   बार सुनो

भगवान में विश्वास करके  मानवता का हित करो।।

कुछ जल रहा है गंध नहीं है

कहिं  कोई धुंआ भी नहीं है

अब कौन किसलिए जल रहा है

अरे कोई जल तो रहा है ।।

पूनम पाठक बदायूँ