रिश्ते

कोमल पल्लव सी अंगड़ाई ली थी पहली बार,
मां ने मुझको प्यार से थामा दिया पिता ने प्यारI ममता के आंचल में पल कर जीवन को देखा मैंने|
और थामकर उंगली उनकी चलना भी सीखा मैंने| मुझको उनसे मिला प्यार का सुंदर सा उपहार,
मां ने मुझको प्यार से थामा दिया पिता ने प्यार |
मेरे सपनों की खातिर अपने सपनों का त्याग किया| स्वयं सही तकलीफें पर मेरे सपनों से प्यार किया |जीवन की हर आंधी पर कर लिया स्वयं अधिकार,
मां ने मुझको प्यार से थामा दिया पिता ने प्यार|
मेरे दिल की हर धड़कन में उनकी धड़कन बसती है| अगर चोट लगती है मुझको दर्द से आंखें भरती है|
"रीत" को भाता है उनका ममता से भरा दुलार,
मां ने मुझको प्यार से थामा दिया पिता ने प्यार |स्वरचित अप्रकाशित एवं मौलिक रचना

लेखिका/ रचनाकार: रीता तिवारी "रीत"