आओ खेले होली

अंतस में रंग ले रंग को,

भीग जाए तन और मन,

ऐसी खेलें होली पिया के संग, 

भुला दे सब बैर और दुश्मनी, 

ऐसी बना ले दुनिया रंगों की प्यारी,

तू तू ना रहे मैं मैं ना रहूं,

सब रंग जाएं एक रंग में, 

प्यारा सा त्यौहार मनाए,

गम और दुख को चलो,

आज फिर दूर भगाएं, 

भिगो लें तन और मन को ,

उस पवित्र रंग के संग, 

आओ फिर खेले होली,

पिया के संग, 

ले आशीर्वाद बुजुर्गों का, 

फिर अनुराग करें ईश्वर का, 

ऐसी खेले होली,

राग, द्वेष दुर्बलता हटाएँ, 

आओ उन सब को, 

बहुत दूर भगाएं, 

ईश्वर से करे प्रार्थना, 

सारे कष्ट हमारे दूर करो ना, 

इस देश की करो रक्षा,

हटा दें इस धरा से करोना,

आओ खेले होली पीय के संग, बनकर राधा और किशन, 

रंग जाए इस पिचकारी से, 

दुनिया सारी और,

इंद्रधनुषी रंग फैल जाए,

आकाश और धरा पर, 

हो जाए रंगों से सराबोर,

होली का यह सतरंगी पावन पर्व, होली की शुभकामनाओं के साथ।। 

संजीव ठाकुर ,अंतरराष्ट्रीय कवि, रायपुर छत्तीसगढ़, 9009 415 415