उनका मिलना

उनका मिलना भी  देखो  ग़ज़ब ढ़ा गया,

एक वो क्या मिले  कि  खुदा  मिल गया,

बादलों से  भी  छन  कर   गिरी  रौशनी,

मेरे दिल के तिमिर को शमा  मिल गया।

एक वो क्या मिले कि......

थी जो  आधी  अधूरी  सी  एक  दास्ताँ,

मेरी   मंजिल   से   उलझा  रहा   रास्ता,

बात बिखरी हुई  थी  ना  सिमटी  कभी,

उनकी नजरों में लफ्ज़े वफा मिल गया।

एक वो क्या मिले......

दिल के उपवन में इक फूल ऐसा खिला,

प्रेम   बरसात  का  साथ  मुझको  मिला,

खिल उठी मेरे अंतस  कि हर इक कली,

मन के मधुबन को अब भँवरा मिल गया

एक वो क्या मिले.....

पल दो पल जो मिला प्यार अनमोल था,

उनका मिलना  मुकद्दर  का ही  खेल था,

वो ना  मिलते  तो  होती मुक्कमल  नहीं,

वो मिले तो मुझे  फिर  जहां  मिल गया।

एक वो क्या मिले......

तुम  ना  आए  तो  देखो  ख़फ़ा   रात  है,

चाँद  से   भी   हुई   ना   कोई    बात  है,

छोड़ो  जाने   दो   शिकवा   करेंगें   नहीं,

मेरे  अश्कों  को अब  वास्ता  मिल गया।

एक वो क्या मिले.....

मेरे   शब्दों   को   उनके  लबों  ने  छुआ,

प्रेम रस का अजब सा  मिलन फिर हुआ,

क्या कहें किस कदर  हम तो  पागल हुए,

मेरे   दिल  को   नया  रास्ता  मिल  गया।

एक वो क्या मिले......

करुणा कलिका, झारखंड