॥ होली ॥


होली का अब क्यूँ है इन्तजार

फागुन की आई मस्ती व बहार

तन पे बरसाती रंगों की फुहार

मस्ती में डुबा है आज संसार


फागुन का महीना है आया

हवा में भंग का नशा है छाया

सब युवा के दिल में है खुमार

होली की मस्ती का गुलजार


जोगीरा की टोली है आई

ढोल झाल संग मंजीरा भी गाई

मस्ती में झूमे है गाँव जवार

होली की मस्ती की चढ़ी बुखार


नये नये कपड़े सब पहने

होली में फाग गाई है सबने

जोकर की टोपी बना है सरताज

किसी को कुछ ना कहना है आज


वो देखो भैय्या की साली

सहेली संग गली में आई

हाथों में रंग व है गुलाल

होली में सब का एक ही है हाल


जिसने होली में प्रीत जगाई

होली में जब जब चेहरा वो दिखाई

उजड़ा जीवन में आज आई है बहार

मस्ती में डूबा है आज संसार


चुनिया मुनिया भी रंग है खेले

चुन्ना मुन्ना होली में जब छेड़े

होली हुड़दंग का है एक त्यौहार

शांति से फाग खेले जो हैं होशियार।


उदय किशोर साह

मो० पो०  जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088