होली रंगों का स्नेह,प्रेम,सौहार्द का त्योहार है

होली का त्योहार करीब आते ही बड़े,बच्चों,बुजुर्गों सभी मे ही उत्साह का संचार हो जाता है।सभी होली आने से पूर्व ही मन मे बहुत सी हुड़दंग करके किसको कैसे परेशान करना है ये बस मन के भीतर सोचते रहते हैं।बच्चे तो होली आने के दस पंद्रह दिन पहले से ही गुब्बारे, पानी मारने की पन्नियां, पिचकारी रंग न जाने क्या-क्या खरीद लेते है और होली आने के पहले ही अपनी मस्ती चालू कर देते हैं।होली से पहले ही राहगीरों पे पानी की बौछारों की शुरुआत कर बुरा न मानों होली है जैसी घोष लगा कर सबके दिल मे एक बेहतरीन त्योहार के आने की उमंग भर देते हैं।बच्चे तो बच्चे बड़े भी न जाने कितने ख्याली पुलाव बना लेते कि होली के दिन क्या और कैसे करना है।बाजारों मे भी मिठाइयां एक माह पूर्व ही मिलना शुरु हो जाती है।ताकि लोग अपने रिश्तेदारों, बेटियों को त्योहार की मिठास की सौगात पहले ही भेज सकें।बस हर ओर रौनक ही रौनक दिखाई देती हैं बाजारों मे भी।रंग,गुलाल,गुब्बारे, पिचकारी और तो और मुखटे और कानों को पीढ़ा देने वाले भोंपू भी मिलते।होली से पूर्व ही इनकी खूब बिक्री होती।

     परंतु इसी सौहार्द और प्रेम के प्रतीक त्योहार होली के रंगों मे कुछ लोग भंग डाल देते हैं और ये भंग डालने की वज़ह है सिर्फ नशा जो अच्छे खासे हस्ते खेलते आनंद लेते त्योहार मे लोगों के बीच भंग पैदा कर देते हैं।होली जैसे पावन पर्व पर जहां रंगों संग सबको रंग मुस्कुराना चाहिये,वहीं दुसरी ओर बहुत से लोग इस पवित्र त्यौहार के रंग मे भंग डाल देते हैं और ये भंग सिर्फ़ पड़ता है खुशियों मे नशे से ही। लोग होली जैसे पवित्र त्यौहार मे खूब शराब पीते हैं जिससे नशे के चलते वो खूब हुडदंग मचाते हैं जो कि बहुत ही गलत है।इससे तो वो त्यौहार मे दूसरों के लिये मुसीबत खड़ी कर देते हैं जिसके चलते बहुत ही वारदातें भी हो जाती हैं।गाड़ियों पर ही ऐसे हुड़दंगी टोलियां बना कर नशे मे जोर-जोर से हार्न भजाते हुए गाड़ियों का गलियों से निकलते हैं जो कि अनैतिक तरीका है होली पवित्र त्योहार है इसे नशे के संग नहीं बल्कि प्रेम,सौहार्द पूर्वक मनाऐं।

वीना आडवाणी
नागपुर, महाराष्ट्र