सहारा न होता

हे ईश्वर तेरा जो सहारा न होता

यह भोर सा किनारा ना होता l

दिल यह ख्वाहिशों से मर जाता

यदि तू प्रभु मुझे पर्याप्त न  होता l

तू आदि है अंत है तू है भोला

क्या होगा जब तीसरी आंख खोला l

जहर को जो तूने पिया न होता,

कलयुग में गुलाब में भी जहर होता l

डम डम डम डमरू बजाया न होता

हर प्राणी जगत का सो रहा होताl

तुझे जितना लिखा =

मैंने तुझे जितना लिखा

तू इतनी बढ़ती चली गई

कौन तेरा यहां पर आका

जो तू इतनी फल फूल गई

तेरा मुंह है जैसे सुरसा

तू कितनों को खा गई

साथियों का देती कद बड़ा

कितनों को तू रुला गई

कब होगी तेरी विदा

कितनों को तू मिटा गई

महंगाई तेरा कटे गला

गरीबों की तू दुश्मन

पूनम पाठक बदायूं