कृषि क्षेत्रों में जल की आपूर्ति बाधित करना, कृषकों के व्यापार और व्यवसाय के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है - हाईकोर्ट

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) ने हर नागरिक को व्यापार और व्यवसाय का मौलिक अधिकार दिया है, इसमें कोई बाधा उत्पन्न नहीं कर सकता - एड किशन भावनानी


गोंदिया - भारतीय संविधान में हर नागरिक को अनुच्छेद 19 (1) के तहत अलग-अलग रूपसे मौलिक अधिकार दिए हैं जो नागरिकों को एक तरह से माना जाए तो सुरक्षा कवच ही है। बात अगर हम अनुच्छेद 19(1) की करें, तो हर नागरिक को भारत में कहीं भी अबाधित रूप से व्यापार और व्यवसाय करने का अधिकार है, जिसमें कोई भी बाधा नहीं डाल सकता यहां तककि कोई सरकारी एजेंसियां भी किसी तरह की रोक टोक किए बिना या कोई कानूनी अड़चन  आपत्ति नहीं डाल सकते बशर्तें वह वैध हो। यदि वह व्यापार व्यवसाय कानून की किसी धारा के अंतर्गत अवैध है तो कानूनी प्रक्रिया, व्यवस्था, प्रणाली, के तहत रोक सकते हैं अन्यथा अनुच्छेद 19(1) के तहत उल्लंघन के दोषी बन जाएंगे,और उन पर कार्यवाही निश्चित है। अनेक बार हम देखते हैं कि अनेक छोटे बड़े व्यापारी, व्यवसायी, किसानी करने वाले नागरिकों को उनके व्यापार, व्यवसाय, किसानी कार्य चलाने के लिए बिजली और पानी तक की समस्या उत्पन्न हो जाती है, मौलिक अधिकारों कीजानकारी की अज्ञानता वश वे कुछ कर पाने में असमर्थ रहते हैं।.. इसी विषय पर आधारित एक मामला माननीय इलाहाबाद हाई कोर्ट में मंगलवार दिनांक 23 मार्च 2021 को माननीय दो जजों की एक बेंच जिसमें माननीय मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति गोविंद माथुर तथा माननीय न्यायमूर्ति सौरभ श्याम श्यामजरे की बेंच के समक्ष जनहित याचिका (पीआईएल) क्रमांक 405/2021, याचिकाकर्ता बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य चार के रूप में आया जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के पश्चात माननीय बेंच ने अपने 2 पृष्ठों के आदेश में के अंतिम पैरा में कहा कि तथ्यों पर विचार करने के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि स्थितियां ऐसी है कि कृषि क्षेत्र में जल की आपूर्ति बाधित हो रही है क्योंकि वहां ट्यूबवेल मेंबिजली के निरंतर आपूर्ति जरूरी है ताकि पानी की आपूर्ति बाधित ना हो और यह संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है क्योंकि यह किसानोंके व्यापार और व्यवसाय को बाधित करता है आगे अपने आदेश में बेंच ने कहा कि बिजली की आपूर्ति बंद करना जिससे कृषि क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बाधित हो जाती है कृषकों के व्यापार और व्यवसाय के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।हाल ही में बेंच ने यह अवलोकन किया कि एक लोकहित में एक नलकूप, जिसे सिंचाई के लिए कृषि क्षेत्र में इस्तेमाल किया गया है, बिजली बहाल करने के लिए एक शिला बनी है। इस मामले में याचियों ने तर्क दिया था कि बिजली के इस तरह के अनाधिकृत बंद होने से पानी के वितरण और अंततः कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है याचिकाकर्ता का कहना था कि ट्यूबबेल का कनेक्शन हर वक्त कटा रहता है। ट्यूबबेल की मरम्मत भी नही की जाती। मरम्मत के लिए कोई एजेंसी ही नही है। जिसके कारण खेती के लिए पानी नही उपलब्ध हो पा रहा है। और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। इस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया तो सरकार ने बताया कि बिजली का कनेक्शन जोड़ दिया गया है। इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि अक्सर कनेक्शन कट जाता है और मरम्मत नही की जाती। प्रारंभ में बेंच ने कहा हमारा विचार है कि जो भी स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए जल आपूर्ति को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन है, बेंच ने संबंधित सरकारी एजेंसियों को यह देखने के लिए भी निदेश दिया कि कमान क्षेत्र में स्थित नलकूप जल के उचितवितरण के लिए प्रचालन और नियमित रूप से रखरखाव और बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान,प्रत्यर्थी अधिकारियों ने प्रस्तुत कियाकि बिजली कनेक्शन पहले से ही बहाल हो चुका है, और इस तरह, याचिका निष्फल हो गई है।याचियों के वकील ने, इस तथ्य को स्वीकार करते हुए कि बिजली कनेक्शन बहाल कर दिया गया है, प्रस्तुत किया कि प्रत्यर्थी पर्याप्त रूप से बिजलीके ट्यूबवेलों का रखरखाव नहीं कर रहे हैं और बिजली का वियोग सामान्य है। इसलिए बेंच ने संबंधित जिला मजिस्ट्रेट को आदेश दिया कि कमान क्षेत्र में स्थित नलकूप के नियमित रखरखाव को सुनिश्चित किया जाए। यह जोड़ा, अन्य कमान क्षेत्रों के लिए विद्युत कंपनियों के संबंधित अधिकारी बिजली औरसंबंधित जिला मजिस्ट्रेट को ट्यूबवेलों के नियमित रखरखाव केलिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे और बेंच ने प्रदेश की सभी विधुत वितरण कंपनियों और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किया है और कहा है कि सिंचाई के लिए विधुत आपूर्ति निर्बाध रूप से चालू रखी जाए।

-संकलनकर्ता कर विशेषज्ञ एड किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र