चार दिनों बाद बैंकों में उमड़ी भीड़, नहीं दिखी कोरोना से कोई सतर्कता

न थर्मल स्कैनिंग, न सेनेटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग भी तार-तार 

प्रतापगढ़। कोरोना का दुबहारा हमला महाराष्ट्र व दिल्ली में हो चुका है। उत्तर प्रदेश में इसका प्रभाव ज्यादा न पडे़, इसके लिये सतर्कता की सख्त आवश्यकता है लेकिन चार दिनों बाद बैंकों के बुधवार को खुलने पर भीड़ उमड़ी। हर बैकों में भीड़ थी। विशेष तौर से स्टेट बैंक, बड़ौदा बैंक, इलाहाबाद बैंक में सुबह से ही पैसा निकालने व जमा करने वालों की भीड़ उमड़ी थी लेकिन भीड़ में न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा रहा था और न ही ज्यादातर लोग मास्क लगाए थे। ऐसे में दिल्ली या महाराष्ट्र से आया कोई व्यक्ति इन बैंकों में पहुंचा हो तो संक्रमण कितनी आसानी से फैल सकता है। बता दें कि पिछले हफ्ते में द्वितीय शनिवार व रविवार को बैंक रुटीन में बंद रही और उसके बाद 15 व 16 मार्च को बैंक कर्मचारियों के हड़ताल के कारण प्रायः बैंकों में ताले नहीं खुले। 17 मार्च को चार दिनों बाद जब बैंकें खुलीं तो हर बैंक में ग्राहकों की भीड़ उमड़ आईं। जिन बैंकों में अभी तक सतर्कता बरती जा रही थी, वहां पर भी आज कोई सतर्कता नहीं दिखाई पड़ी। न कहीं सेनेटाइजर था और न ही कहीं थर्मल स्कैनिंग। इस बारे में बैंकों का कहना है कि कोई गाइडलाइन नहीं मिली है लेकिन कोरोना जैसे संक्रामक रोग से हर व्यक्ति को सतर्क रहना पडे़गा, नहीं तो एक साल बाद जो राहत उत्तर प्रदेश के लोग महसूस कर रहे हैं, वह छिन जाने का डर है। यही हाल बाजारों, जिला कचहरी व सावर्जनिक क्षेत्र में भी देखा जा सकता है। ऐसे स्थानों पर मास्क को अनिवार्य करना चाहिये और सोशल डिस्टेंसिंग लोग व्यक्तिगत रुप से अपनाएं तभी कोरोना महामारी से बचा सकता है, लेकिन अभी पूर्णतया लापरवाही दिखाई पड़ रही है।