“कश्मकश”

युग जागरण न्यूज़ नेटवर्क

थक चुकी है रूह

समझ को समझा के

आखिर क्या हु मैं 

और क्या नहीं 

जो हूं वो समझा नहीं 

पाती मैं किसी को 

जो नहीं हूं लोग वैसा

समझ जाते हैं

 तू ही जाने हैं मुझे 

ओ त्रिनेत्री!!

 गुनहगार होती गर तो

 कबूल मेरी भक्ति कर 

मुझे आशीष न देता 

खामोश क्यों हो फिर 

बोलता क्यों नहीं 

रोती हूं मैं जिन अश्कों को 

खामोश नेत्रों से उन्हें 

क्यों पीता है

 तू तो सब जाने है न बाबा 

क्या क्यों कैसे करती हूं मैं 

ड़ोर तो तेरे हाथ में है न बाबा

तेरी नजर में गलत हूं तो 

सजा की जगह 

आसरा क्यों देता है

तुझ से परे तो यह जहां 

नहीं है फिर किस हक से 

वो सजा देता है

जिंदगी के कुछ ही कदम 

गिने है अब तक मैंने 

कोशिश नहीं की फिर भी

अनजाने में भी कि 

दिल दुखे किसी का मुझसे 

महान तो नहीं हूं मैं भोले

पर तू जानता है ना 

जितना भी किया है अब तक

खातिर दूसरों की खुशी के किया है

गलती से अगर हो गई कोई खता

तो तूने हर दफा माफ किया है

पर परे तुझसे जाके 

कदम-कदम पर फिर भी

अपनों ने ही क्यों गुनहगार 

साबित किया है 

हु तेरी दया के काबिल तो

उलझी डोर सुलझा देना मेरी

नहीं सुलझती तो टूट ही जाएगी

इस अजीब कशमकश में 

सिमट जाएगी सहमी पलकें

आंखें नीरव नादान-सी थम जाएगी !!

नीतु झारोटिया”रुद्राक्षी”

अजमेर (राजस्थान)

मोबाइल न.-7073636609

email address:-

neetujharotia92@gmail.com