परमानंद राय : गोशाला के निमित्त आया धन ग्राम प्रधान से लेकर सम्बंधित अधिकारी बंदर बांट कर खा गए।

मनिहारी(गाजीपुर ) : उत्तर प्रदेश के भाजपा शासित योगीराज में शासन प्रशासन से जुड़े आला ‌अधिकारियों कर्मचारियों की मनमानी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। विकास के नाम पर लूट खसोट का खुला खेल  कहीं पर भी देखा जा सकता है। पैसा फेंको तमाशा देखो की तर्ज पर काम कर रहे आला अधिकारी जन समस्याओं को सुनने के लिए तैयार ही  नहीं है ।सबकी छोड़िए सत्ता पक्ष से तमाम ऐसे जुड़े लोग हैं जिनका शीर्ष नेतृत्व से सीधा संपर्क है उनकी शिकायतों का भी कोई असर नहीं है जो आश्चर्य  ही नही सत्य भी है यह कहना है भाजपा के ऊंची पहुंच के दमदार नेतृत्वकर्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी पारस नाथ राय के छोटे भाई परमानन्द राय का। उन्होंने ने बिना लाग-लपेट कहा कि गोवध अधिनियम की कड़ाई के चलते क्षेत्र में आई आवारा पशुओं की बाढ़ ने किसानों के नाकों में दम कर रखा है ।आरोप लगाया कि पशुओं के नाम पर सुरक्षा स्वास्थ्य एवं चारे का प्रबंध तो दूर, जांच के नाम पर भी पैसा लेकर खानापूर्ति किया जाता है। शासन द्वारा पोषित प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारी ‌शासनादेश की हवा निकाल कर रख दिए हैं। जिसके चलते शासनादेश और जनहित में संचालित योजनाएं फेक न्यूज़ बनकर रह गई है। जगह-जगह पानी की तरह बहाकर करोड़ों की लागत से बने गौशाला बेमतलब साबित हो रहे  हैं।जिसके चलते सैकड़ों की समूह में घुमते छुट्टे आवारा पशु किसानो की फसल चरते हुए लाठी डंडे के अलावा धारदार हथियारों से गम्भीर रूप से घायल होकर दम तोड़ रहे हैं। पशुओं की दुर्दशा को देखते हुए जनपद के मनिहारी विकास खण्ड के सिखड़ी गांव में एक किसान परमानंद राय ने विगत दो वर्षों से 35से40 की संख्या में छुट्टे लावारिस पशुओं को अपने दरवाजे पर चारा पानी का प्रबंध कर बेजुबानों को जीवन दान देने का जो काम किया है चर्चा का विषय है।  परन्तु अब धैर्य ज़बाब  देने को बाध्य है।जिसकी जानकारी शासन प्रशासन को  होने के बावजूद कानपर जूं तक नहीं रेंगा बल्कि कार्रवाई के नाम पर स्थलीय निरीक्षण कर अपना पल्ला झाड़ लिया। क्षेत्र के बड़े और सम्मानित किसान परमानंद राय ने बताया कि- भाजपा के प्रभारी मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल के माध्यम से पशुओं के खाने पीने रहने की मुकम्मल व्यवस्था के लिए सी०डी०ओ०,वी०डी०ओ०से लिखित शिकायत के बावजूद विगत दो वर्षों से अबतक कोरा आश्वासन के अलावा कुछ हल नहीं निकला। जबकि पशुओं के लिए सुरक्षित ज़मीन गांव में उपलब्ध है। गोशाला के निमित्त आया धन ग्राम प्रधान से लेकर सम्बंधित अधिकारी बंदर बांट कर खा गए। पशु बध के खिलाफ कड़े कानून की हिमायती बाबा की सरकार में पालतू अधिकारी कर्मचारी जनता की निगाह में ‌शो पीस‌ बनकर रह गए हैं।