निषाद मछुआरों को परंपरागत अधिकारों से वंचित करने में जुटी है योगी सरकार: लौटन राम

लखनऊ। निषाद,मछुआ समुदाय की मल्लाह, केवट, बिन्द, मांझी, कश्यप, धीवर, धीमर, गोड़िया, तुरहा, बाथम, रायकवार, आदि जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के प्रस्ताव 10 मार्च, 2004 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी ने केन्द्र सरकार को भेजा था। रजिस्ट्रार जनरल आॅफ इण्डिया द्वारा उक्त जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने सम्बन्धी आवश्यक आधार व इथनोग्राफिकल सर्वे रिपोर्ट मांगा था। उत्तर प्रदेश शासन में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान से सर्वे कराकर 403 पृष्ठीय व्यापक सर्वेक्षण रिपोर्ट भेजा। परन्तु केन्द्र की कांग्रेस सरकार सवाल दर सवाल कर मामले को उलझाये रखा गया। कांग्रेस ने विधान सभा चुनाव 2007 के चुनाव घोषणा पत्र में संकल्प लिया था कि अन्य राज्यों की भांति निषाद, मछुआ समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाया जायेगा। समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ  के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष चै0 लौटन राम निषाद ने कहा कि कांग्रेस व भाजपा के कारण निषाद जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल पाया। उन्होंने योगी सरकार पर निषाद मछुआरों को परम्परागत अधिकारों व पुश्तैनी पेशों से बेदखल करने का आरेाप लगाया है। निषाद ने बताया कि भाजपा ने विधान सभा चुनाव 2012 के चुनाव घोषणा पत्र व भाजपा दृष्टि पत्र में निषाद मछुवा समुदाय की जातियों सहित नोनिया, चौहान , कुम्हार, राजभर, बंजारा आदि जातियों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने तथा निषाद मछुआ समुदाय की परम्परागत पेशो को दिलाये जाने का संकल्प किया था। परन्तु वर्तमान भाजपा सरकार निषाद समाज के मत्स्य पालन, बालू, मौरंग खनन जैसे परम्परागत पेशों को सार्वजनिक कर निषाद समाज को बेकारी की स्थिति में पहुॅचा दिया। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार द्वारा 5 अप्रैल निषाद राज व कश्यप)षि जयन्ती का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। जिसे योगी सरकार ने खत्म कर राम-निषाद राज की मित्रता का हवाला देकर निषादों का वोट लेने वाली भाजपा में प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया। निषाद ने बताया कि 16 फरवरी, 2013 को अखिलेश यादव की सरकार ने 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा था। 22 दिसम्बर व 31 दिसम्बर 2016 को 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल मझवार, तुरैहा, गोड़, बेलदार, शिल्पकार, पासी तड़माली के साथ परिभाषित कर अनुसूचित जाति के आरक्षण का लाभ देने के लिए शासनादेश जारी किया था। उक्त मामला माननीय उच्च में गया। 24 जनवरी 2017 को शासनादेश के विरू( दाखिल याचिकाओं के आधार पर स्थगित कर दिया गया। राष्ट्रीय निषाद संघ के पक्षकार बनने पर अधिवक्ता द्वारा रखे गये पक्ष के आधार पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ में प्रमाण-पत्र बनाने का अंतरिम निर्णय दिया। योगी सरकार ने नये सिरे से शासनादेश जारी कर निषाद समाज के साथ विश्वास घात किया। बाद में केन्द्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलौत ने विचाराधीन प्रस्ताव को निरस्त कर दिया। उन्होंने भाजपा पर निषाद समुदाय की जातियां के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है।