बकरे खुद बताएं

एक कसाई ने दिया है छूट,
बकरे खुद बताए़।

है मजा ज्‍यादे जबह में,
या कि झटके के कतल में।
करके बधिया बलि चढ़ायू,
या बधूं पूरी शकल में।

मेरी बेवसाइट पे लिखिए,
क्‍या करेगा सूट।
बकरे खुद बताएं।
एक कसाई ने दिया है छूट,
बकरे खुद बताएं।

कह रहा है मैं हूं सेवक,
आप केवल बोलिए।
मैं करूंगा कत्‍ल वैसे ही,
जुबां तो खोलिए।

मौज से मरने का अवसर,
बढ़ के लीजे लूट।
बकरे खुद बताएं।
एक कसाई ने दिया है छूट।
बकरे खुद बताएं।

बोलिए धरती और धन,
धनपति के हैं।
नदी, पर्वत और वन,
धनपति के हैं।

इसपे अपना हक जताकर,
बोलिए मत झूठ।
बकरें खुद बताएं।
एक कसाई ने दिया है छूट
बकरें खुद बताएं।

कोसिए गांधी को कहिए,
देश बांटा।
मारिए नेहरू को कहकर,
देश बेचा।

जल्‍द ही सरकार दिलवाएगी,
सबको बूट।
बकरें खुद बताएं।
एक कसाई ने दिया है छूट,
बकरे खुद बताएं।

-धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव
सम्पादक
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