"स्त्री धन और पैतृक संपत्ति पर स्त्री के अधिकार से आज भी बेखबर है कुछ औरतें "

स्त्री विमर्श में कुछ भी लिखने से पहले एक ही खयाल आता है कि क्यूँ आख़िर महिलाओं से जुड़े हर मुद्दों को चिल्ला चिल्ला कर बार-बार लिखना पड़ता है, दोहराना पड़ता है। आज भी कुछ पढ़ी लिखी महिलाओं को अपने कानूनन हकों के बारे में जानकारी नहीं होती। स्त्री धन क्या होता है, और पैतृक संपत्ति पर बेटी का हक होता है या नहीं इन सारी बातों की हर एक महिला को समझ होनी चाहिए।
इस प्रकार के धन को स्त्री धन कहते है, विवाह में होम के समय जो धन मिले वह अध्यग्निक, पिता के यहाँ से जाते समय जो मिले वह अध्यावाहनिक, पति प्रसन्न होकर जो दे वह प्रीतिदत्त, और माता से प्राप्त मातृत्त, पिता से प्राप्त पितृदत्त तथा भ्राता से जो धन मिले वह भ्रातृदत्त कहलाता है । इस धन पर पानेवाली स्त्री का ही अधिकार होता है, और किसीका कोई अधिकार नहीं होता।
शादी के वक्त जो उपहार, जेवर, आदी लड़की को दिए जाते हैं, उसे स्त्रीधन कहते हैं। इसके अलावा लड़के और लड़की, दोनों को जो फर्नीचर, टीवी या दूसरी चीजें दी जाती हैं, वे भी स्त्रीधन के दायरे में आती हैं। स्त्रीधन पर स्त्री का पूरा अधिकार है और ये दहेज नहीं है। लेकिन शादी के वक्त लड़के को दिए जाने वाले जेवर, कपड़े, आदि दहेज के दायरे में आते हैं। अगर किसी महिला का स्त्रीधन उसकी मर्जी के बिना कोई और रख ले तो उसके विपरीत कानूनी कार्यवाही की जोगवाई धारा 14, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के अधीन आता है।
स्त्रीधन पर एक महिला के क्या-क्या अधिकार हैं? किसी भी महिला की उनकी अलग विशिष्ट संपत्ति है और किसी और के पास इस पर कोई अधिकार नहीं है कि वह आपसे इस अधिकार को छीने या उस पर अपना हक़ जताए।
महिला के पास इसे अपने पास रखने, इसे अपने नियंत्रण में संग्रहीत करने, और इसका उपयोग करने का पूर्ण अधिकार होता है। इस अधिकार को भी आपसे कोई नहीं छीन सकता।
यदि किसी महिला को कभी भी अपना ससुराल छोड़ना पड़ता है, तो वह अपने स्त्रीधन को अपने साथ ले जा सकते हैं। इसके लिए उन्हें कोई नहीं रोक सकता।
यदि आपके पति का परिवार आपको अपना स्त्रीधन लेने नहीं दे रहा है, तो आप तुरंत अपने स्त्रीधन को आपको सौंपने के लिए पुलिस शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिस पर कड़ी कार्यवाही की जा सकती है।
कई महिलाएं ससुराल पक्ष की ओर से प्रताड़ना का शिकार होने के बाद घर से अलग कर दी जाती हैं। ऐसी स्थिति में विवाह के समय महिला को दिया गया स्त्रीधन अधिकतल ससुराल पक्ष द्वारा ही रख लिया जाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की स्पष्ट व्याख्या कर इस पर महिला का ही अधिकार बताया है।
लड़की पैदा होते ही उसे पराया धन करार दिया जाता है। उसके बड़े होते ही उसकी शादी कर दी जाती है। अगर किसी वजह से ससुराल वाले भी उसे निकाल दें तो उसके पास मायके आने का ही विकल्प बचता है। या मान लीजिए पति की मृत्यु हो जाए और ससुराल वाले बहु को अपनाने से इनकार कर दें ऐसे में लड़की के पास मायके की संपत्ति में हिस्सा लेने का हक है या नहीं ? बेटी का अपने मायके की संपत्ति में कितना हक होता है, क्या बेटी अपने दादा की संपत्ति में हिस्सेदार होती है, शादीशुदा होने के बाद भी बेटी को हक मिल सकता है या नहीं। महिलाओं के लिए ये सब जानना बेहद जरूरी है।
अपने पिता की यानि पैतृक संपत्ति पर बेटी का भी उतना ही अधिकार होता है जितना कि बेटे का होता है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया है। भले ही हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 (amendment in the Hindu Succession Act, 2005) के लागू होने के पहले ही उसके पिता की मृत्यु क्यों न हो गई हो। अदालत ने कहा है कि संशोधित हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत यह बेटियों का अधिकार है। बेटी हमेशा बेटी ही रहती है। हिंदू महिला को अपने पिता की संपत्ति में भाई के समान ही हिस्सा मिलेगा।
अगर आपको पैतृक संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार कर दिया जाता है तो आप एक कानूनी नोटिस भेज सकते हैं। आप अपने हिस्से पर दावा करने के लिए सिविल कोर्ट में मुकदमा भी दायर कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मामले के विचाराधीन होने के दौरान प्रॉपर्टी को बेचा न जाए। उसके लिए आप उसी मामले में कोर्ट से रोक लगाने की मांग कर सकते हैं। मामले में अगर आपकी सहमति के बिना ही संपत्ति बेच दी गई है तो आपको उस खरीदार को केस में पार्टी के तौर पर जोड़कर अपने हिस्से का दावा करना होगा। कई महिलाएं इस बात से डरती है और प्रताड़ित होती रहती है कि पति ने छोड़ दिया, या ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया तो क्या करूँगी, कहाँ जाऊँगी ऐसी महिलाओं को समझना चाहिए कि लगभग सारे कानून स्त्रियों के हक में है, जरूरत है जागरूकता की। अगर आपको कायदे, कानून समझ नहीं आते तो किसी जानकार वकील की सलाह लें और अपने हक के लिए सावधान रहें।

(भावना ठाकर, बेंगुलूरु)#भावु