॥ चाँदनी ॥

अय चन्दा तुँ चन्दन सी चाँदनी

और ठंडक किस देश से लाती हो

मीठी मीठी तेरी चाँदनी हमको

सकून व शांति दे जाती हो


तेरे ऑचल में नहीं है कोई रोशनी

फिर भी जग  को उजियाला करती हो

दिवस कितना भी क्रुध गरम हो

रात तूँ ठंडक पहुँचाती हो


तेरी प्रकृति में क्रोध नहीं है

नहीं तेरी नीयत है खोटी

दोस्त हो या दुश्मन कोई

सब पाते हैं तुमसे मुफ्त में ज्योति


मुस्कुराकर करती हो अभिवादन

और देती हाे शांति का पैगाम

काश ! तेरे गुण मानव अपनाता

और तब आता जग में विश्व शांति


निन्दिया की आगोश में छुपकर

जग सपनों में खो जाता है

तब निशाचर रात में जगकर

निरिह लाचार की शिकार कर जाता है


अच्छे बुरे कृत्य का तुँ ही गवाह है

पर मूक दर्शक क्यूँ बन जाती हो

तेरी चुप्पी पर लाभ पा अपराधी

कानून से बाईज्जत बच जाता है


उदय किशोर साह

मो० पो० जयपुर जिला बाँका बिहार

9546115088